चारबाग से चौक तक दौड़ेगी मेट्रो, बनेंगे 7 अंडरग्राउंड स्टेशन; 1877 करोड़ का मेगा टेंडर जारी

लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए UPMRC ने ₹1877.89 करोड़ का सबसे बड़ा सिविल टेंडर जारी किया है. यह टेंडर चारबाग से चौक तक 7 अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों और सुरंगों के निर्माण के लिए है. यह लखनऊ को बेहतर कनेक्टिविटी देगी और टिकाऊ शहरी परिवहन को बढ़ावा देगी.

लखनऊ मेट्रो (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1बी) परियोजना के लिए 1877.89 करोड़ रुपये सबसे बड़ा सिविल टेंडर जारी किया है. यह टेंडर चारबाग से वसंतकुंज तक प्रस्तावित 11.165 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के अंतर्गत बनने वाले 7 अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों और सुरंग निर्माण के लिए जारी किया गया है.

यह परियोजना लखनऊ मेट्रो फेज-1बी का अब तक का सबसे बड़ा सिविल टेंडर है. जारी टेंडर 28 जुलाई को खोला जाएगा और चयनित एजेंसी को 36 माह के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा. इस अंडरग्राउंड सेक्शन में चारबाग, गौतमबुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी, मेडिकल चौराहा और चौक सहित कुल सात अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे.

5 एलिवेटेड, 7 अंडरग्राउंड, कुल 12 मेट्रो स्टेशन

इसके अलवा, चौक स्टेशन से एलिवेटेड कॉरिडोर को जोड़ने के लिए लगभग 350 मीटर लंबा रैंप भी तैयार किया जाएगा. UPMRC पहले ही ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन, पांच मेट्रो स्टेशनों, वायाडक्ट और वसंतकुंज मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर चुका है. अब अंडरग्राउंड सेक्शन का टेंडर जारी होने के साथ निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ गई है.

UPMRC करीब 5801 करोड़ रुपये की लागत से लखनऊ मेट्रो फेज-1बी का निर्माण कर रहा है. परियोजना के तहत 5 एलिवेटेड और 7 अंडरग्राउंड, कुल 12 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. एलिवेटेड और अंडरग्राउंड दोनों सेक्शन का निर्माण एकर साथ किया जाएगा, जिससे निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे कॉरिडोर पर मेट्रो संचालन शुरू किया जा सके.

फेज-1बी परियोजना के लिए यह मील का पत्थर- MD

UPMRC के एमडी सुशील कुमार ने कहा कि अंडरग्राउंड सेक्शन के इस प्रमुख सिविल टेंडर का जारी होना लखनऊ मेट्रो फेज-1बी परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. इससे पुराने लखनऊ सहित घनी आबादी वाले क्षेत्रों को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी और शहर में यातायात का दबाव कम होगा. सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा.

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