लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर अप्रैल से ही 120 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन, 40 मिनट में सफर होगा पूरा, हाईटेक सुविधाओं से लैस
बहुप्रतीक्षित 6 लेन वाला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनकर लगभग तैयार हो गया है.करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण 5 जनवरी, 2022 को शुरू हुआ था. इस एक्सप्रेस-वे पर तकरीबन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेंगी. कानपुर से लखनऊ के बीच की दूरी सिर्फ 40 मिनट में पूरी की जा सकेगी.
कानपुर और लखनऊ के बीच का सफर अब न केवल सुगम होने जा रहा है, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी. बहुप्रतीक्षित 6 लेन वाला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनकर लगभग तैयार हो गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने संकेत दिए हैं कि इसी अप्रैल महीने में लोकार्पण के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. इस अत्याधुनिक मार्ग पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रतिघंटा तय की गई है. दोनों शहरों के बीच की दूरी महज 35 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी.
करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण 5 जनवरी, 2022 को शुरू हुआ था. हालांकि, निर्माण कार्य अपने निर्धारित समय से लगभग आठ महीने की देरी से चल रहा है. परियोजना निदेशक (पीडी) नकुल प्रसाद वर्मा के मुताबिक इस विलंब का मुख्य कारण बंथरा के पास स्थित डबल सर्किट पावर ग्रिड लाइन थी. हाईटेंशन विद्युत लाइन के विस्थापन में आए तकनीकी अवरोधों के कारण काम अटका हुआ था, जिसे अब सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है. वर्तमान में पुराने हाईवे से यात्रा करने पर दो से ढाई घंटे का समय लगता है, जिससे अब मुक्ति मिलेगी.
परियोजना की ये हैं विशेषताएं
3700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है. परियोजना की प्रमुख विशेषताएं है कि इसमें अंडरपास का जाल मौजूद है. मार्ग पर 11 वाहन अंडरपास (VUP), 13 लाइट वाहन अंडरपास (LVUP) और 11 पैदल पारपथ बनाए गए हैं. यात्रा को निर्बाध बनाने के लिए एक 9.59 किमी लंबा फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज और चार प्रमुख पुलों का निर्माण किया गया है.
सुरक्षा के लिए किए गए हैं ये इंतजाम
सुरक्षा के लिहाज से पूरे मार्ग पर 63 PTZ कैमरे, 21 इंटरचेंज कैमरे और 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं. इन कैमरों की 24×7 निगरानी के लिए दो अत्याधुनिक कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं. यह एक्सप्रेस-वे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक गलियारे के लिए एक ‘लाइफलाइन’ साबित होगा.
लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी
एनएचएआइ अधिकारियों का मानना है कि इस मार्ग के खुलने से कानपुर और लखनऊ के बीच लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी. यह अत्याधुनिक मार्ग क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नए आयाम प्रदान करेगा. अब बस प्रशासन को औपचारिक लोकार्पण की प्रतीक्षा है. यह अप्रैल महीने के आखिरी दो सप्ताह में हो सकता है, जिसके बाद अप्रैल महीने में ही गाड़ियां इस पर फर्राटा भरने लगेंगी.
