गोविंदा-प्रिति जिंटा को बुलाकर रौला जमाया, 10 मिनट में ही ठगी को दे देता था अंजाम… लखनऊ के सुपर फ्रॉड की ये है असल कहानी
लखनऊ पुलिस ने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले शातिर प्रेम प्रकाश को गिरफ्तार किया है. बिहार का ये ठग देश भर में लोगों को झांसे में लेकर लाखों ऐंठता था. पहले भी जेल जा चुका प्रेम प्रकाश, जेल से भागकर फिर लखनऊ में सक्रिय हुआ था. उसके साथी संतोष कुमार को भी पकड़ा गया है.
देश में अच्छे मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने की होड़ कोई नई बात नहीं है. बेहतर से बेहतर कॉलेज दिलाने के नाम पर कई बार विद्यार्थियों को ठगा भी जाता है. अब ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यह शातिर ठग बिहार का रहने वाला है, लेकिन अब लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है. चिनहट के कठौता झील के पास से पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रेम प्रकाश विद्यार्थी उर्फ अभिनव शर्मा और उसके साथी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया. प्रेम प्रकाश की उम्र लगभग 35 वर्ष है और वो मूल रूप से औरंगाबाद, बिहार का निवासी है. वोीं, उसका साथी संतोष करीब 34 साल का है और समस्तीपुर का रहने वाला है.
पुलिस का कहना है कि इस गैंग ने मिलकर लखनऊ में करीब 1.26 करोड़ रुपये की ठगी की थी. पूछताछ के बाद जो खुलासे हुए, वे और भी चौंकाने वाले थे. अब पता चला है कि इसने पूरे देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है.
10 मिनट में कर देता था ठगी का काम
घटना के संबंध में डीसीपी ईस्ट कमलेश दीक्षित ने बताया कि प्रेम प्रकाश इतना शातिर है कि सिर्फ 10 मिनट बात करने के बाद ही अभिभावक उसके झांसे में आ जाते थे. वो बातचीत में लोगों को ऐसे उलझा देता था कि परिवार वाले बिना कुछ सोचे-समझे लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते थे.
लखनऊ में उसका ‘स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी’ नाम से लग्जरी ऑफिस था, जहां करीब 50 कर्मचारी काम करते थे. हैरानी की बात यह थी कि ऑफिस में कोई भी कर्मचारी अपना मोबाइल फोन नहीं रखता था. किसी क्लाइंट के आने पर प्रेम प्रकाश खुद लग्जरी कार में उनके पास जाता, बातचीत कर काउंसलिंग करता और फिर लौट आता था.
2019 में हो चुका है गिरफ्तार
प्रेम प्रकाश को बिहार पुलिस ने साल 2019 में मेडिकल एडमिशन ठगी के मामले में गिरफ्तार किया था. बेउर जेल में 6 साल की सजा काटते समय उसने साथी कैदी संतोष कुमार को अपने गैंग में शामिल कर लिया. जेल से ही उसने संतोष को निर्देश देकर ठगी का पूरा नेटवर्क चलाया, जिसके लिए संतोष को हर महीने 30,000 रुपये और कमीशन मिलता था.
सितंबर 2024 में सहारनपुर कोर्ट में पेशी के दौरान प्रेम प्रकाश बिहार पुलिस की अभिरक्षा से ट्रेन से कूदकर फरार हो गया. उसने संतोष के आधार कार्ड को एडिट कर अपना फर्जी आधार बनाया और होटलों में छिपकर रहने लगा. कुछ समय बाद उसने लखनऊ में नया ऑफिस खोलकर फिर से ठगी शुरू कर दी.
पूछताछ में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
पूछताछ में पता चला कि प्रेम प्रकाश ने बिहार में 5 करोड़ रुपये का लग्जरी बंगला बनवाया है. इसके अलावा वाराणसी और बिहार में कई करोड़ की संपत्ति खरीदी है. उसके घर में इंपोर्टेड फर्नीचर और लग्जरी सामान भरा हुआ है. लखनऊ में उसने प्रॉपर्टी नहीं ली, लेकिन बड़ी मात्रा में ज्वैलरी खरीदी है.
मथुरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले प्रेम प्रकाश ने कॉलेज के दौरान ही छात्रों के एडमिशन कराकर कमीशन लेना शुरू कर दिया था. नौकरी की कम सैलरी से असंतुष्ट होकर उसने ठगी को ही अपना फुल-टाइम पेशा बना लिया. वो अलग-अलग शहरों में कंसल्टेंसी खोलता, 5–7 करोड़ रुपये की ठगी करता और फिर ऑफिस बंद कर फरार हो जाता था.
पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल ठग और उसके सहयोगी के पास से फर्जी आधार कार्ड, एक लग्जरी कार, कई सिम कार्ड और ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद किए हैं. उसके खिलाफ लखनऊ सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और मध्य प्रदेश में कई मामले दर्ज हैं. पुलिस अब उसके सभी खातों को फ्रीज करने और गैंग के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई कर रही है.
