बाराबंकी और उन्नाव तक जाएगी लखनऊ मेट्रो, 40 लाख लोगों को होगा फायदा, बनेगा 150 KM लंबा नया नेटवर्क

लखनऊ में दस नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे राजधानी का मेट्रो नेटवर्क मौजूदा रेलवे नेटवर्क से भी बड़ा हो जाएगा. प्रस्तावित विस्तार के बाद मेट्रो सेवा लखनऊ की सीमाओं को पार कर आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों तक पहुंचेगी. योजना के अनुसार अयोध्या रोड पर बाराबंकी, सीतापुर रोड पर इटौंजा, कानपुर रोड पर उन्नाव और हरदोई रोड पर संडीला तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाएगा.

लखनऊ मेट्रो (प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Credit:

राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के बड़े विस्तार की तैयारी शुरू हो गई है. लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण के लिए टेंडर प्रक्रिया तेज कर दी गई है और जुलाई से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है. इसके साथ ही आने वाले वर्षों में शहर और आसपास के इलाकों को जोड़ने के लिए करीब 150 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो नेटवर्क विकसित किया जाएगा. इस परियोजना पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित विस्तार के तहत दस नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे राजधानी का मेट्रो नेटवर्क मौजूदा रेलवे नेटवर्क से भी बड़ा हो जाएगा. मेट्रो प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर तैयार प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिल चुकी है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है.

शहर से बाहर तक पहुंचेगी मेट्रो

प्रस्तावित विस्तार के बाद मेट्रो सेवा लखनऊ की सीमाओं को पार कर आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों तक पहुंचेगी. योजना के अनुसार अयोध्या रोड पर बाराबंकी, सीतापुर रोड पर इटौंजा, कानपुर रोड पर उन्नाव और हरदोई रोड पर संडीला तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाएगा. इसके अलावा पीजीआई, मोहनलालगंज और बख्शी का तालाब भी मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे.
एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया तक संचालित मौजूदा मेट्रो लाइन को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है, जिससे राजधानी के दूरस्थ इलाकों तक निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सके.

40 लाख आबादी को होगा लाभ

मेट्रो विस्तार के बाद राजधानी और आसपास के क्षेत्रों की करीब 35 से 40 लाख आबादी को इसका सीधा लाभ मिलने का अनुमान है. इससे सड़क यातायात का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा.

इन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ

प्रस्तावित नेटवर्क के दायरे में पीजीआई, मोहनलालगंज, गोसाईंगंज, बंथरा, राजाजीपुरम, काकोरी, दुबग्गा, मलिहाबाद, रहीमाबाद, कमता, चिनहट, मटियारी, बीबीडी, तिवारीगंज, सफेदाबाद, मड़ियांव, केशवनगर, आईआईएम रोड, छठा मील, बख्शी का तालाब, इटौंजा और जानकीपुरम समेत कई प्रमुख इलाके शामिल किए गए हैं.

स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाएं

डीपीआर में सभी प्रस्तावित मेट्रो स्टेशनों पर पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं विकसित करने का भी प्रावधान किया जा रहा है. यात्रियों को ई-साइकिल और ई-बाइक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि अंतिम छोर तक आवागमन आसान बनाया जा सके.

मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी

सूत्रों का कहना है कि परियोजना की निगरानी मुख्य सचिव के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर की जा रही है. यही कारण है कि मेट्रो अधिकारी फिलहाल योजना के विभिन्न पहलुओं पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं. यदि प्रस्तावित योजना तय समय पर पूरी होती है तो अगले एक दशक में लखनऊ देश के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क वाले शहरों में शामिल हो सकता है.

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