मुख्तार की जमीन पर बने फ्लैटों पर घमासान, CM ने गरीबों को दी थी चाबी; अब सिंचाई विभाग ने बताया अपना

लखनऊ के डालीबाग में मुख्तार अंसारी की कब्जामुक्त जमीन पर बने 72 गरीब परिवारों के फ्लैटों पर घमासान छिड़ गया है. मुख्यमंत्री द्वारा आवंटित इन फ्लैटों पर सिंचाई विभाग ने अपनी जमीन बताकर बेदखली का नोटिस चस्पा कर दिया. हालांकि एलडीए ने इसे गलती बताकर नोटिस हटाने की बात कही.

मुख्तार अंसारी के बंगले की जमीन पर बने फ्लैटों पर नोटिस Image Credit:

लखनऊ के पॉश इलाके डालीबाग स्थित सरदार पटेल आवासीय योजना में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सिंचाई विभाग ने यहां बने फ्लैटों को अपनी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए खाली करने का नोटिस चस्पा कर दिया. सबसे बड़ी बात यह है कि यही 72 फ्लैट नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खुद आवंटित किए थे.

नोटिस लगते ही कॉलोनी में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई. फ्लैटों की दीवारों पर लाल क्रॉस का निशान बनाकर सात दिन में परिसर खाली करने की चेतावनी दी गई. इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और आवंटियों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. यह फ्लैट्स माफिया मुख्तार अंसारी के ध्वस्त किए गए बंगले की जमीन पर बनी है.

भूमि को बताया हैदर कैनाल बांध की जमीन

यह वही परियोजना है जिसे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने डालीबाग में माफिया मुख्तार अंसारी के ध्वस्त किए गए बंगले की जमीन पर विकसित किया था. करीब 2,314 वर्गमीटर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर एलडीए ने यहां गरीबों के लिए 72 फ्लैटों का निर्माण कराया था. चार मंजिला तीन ब्लॉकों में बने इन फ्लैटों का क्षेत्रफल 36.65 वर्गमीटर है.

इसमें प्रत्येक फ्लैट की कीमत लगभग 10.70 लाख रुपये निर्धारित की गई थी. सरदार पटेल जयंती के अवसर पर 4 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लाभार्थियों को आवंटन पत्र और चाबियां सौंपी थीं. वहीं, अब सिंचाई विभाग के लखनऊ खंड-दो, शारदा नहर से जुड़े अधिकारियों दावा किया कि यह भूमि हैदर कैनाल बंधे की सरकारी जमीन है.

निर्माण शुरू होने से पहले क्यों नहीं बताया- पीड़ित

नोटिस में कहा गया कि सात दिन के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया तो विभाग स्वयं कार्रवाई करेगा और होने वाली क्षति के लिए कब्जेदार जिम्मेदार होंगे. साथ ही शमन शुल्क और हर्जा-खर्चा भी वसूलने की चेतावनी दी गई. नोटिस के बाद आवंटियों में भारी नाराजगी देखने को मिली. लोगों का कहना है जब मुख्तार अंसारी का बंगला था, तब किसी ने जमीन पर दावा नहीं किया.

आवंटियों का कहना है कि यदि जमीन को लेकर कोई विवाद था तो निर्माण शुरू होने से पहले ही उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए था. अब जब गरीब परिवारों को सरकारी योजना के तहत मकान मिले हैं, तब अचानक भूमि विवाद सामने लाया जा रहा है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर सरकारी विभागों के बीच विवाद का खामियाजा वे क्यों भुगतें?

देर शाम सिंचाई विभाग की ओर से दी गई सफाई

मामले की जानकारी मिलते ही एलडीए मुख्यालय में भी हलचल बढ़ गई. सूत्रों के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जानकारी शासन स्तर पर भेजी गई. एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई. उन्होंने स्वीकार किया कि नोटिस चस्पा करने में गलती हुई है और इसे हटा लिया जाएगा.

वहीं, विवाद बढ़ने के बाद देर शाम सिंचाई विभाग की ओर से सफाई जारी की गई. विभाग ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल आवास योजना के अंतर्गत बने फ्लैटों पर कोई नोटिस जारी या चस्पा नहीं किया गया है. हालांकि दिनभर चले घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जमीन विवादित थी तो मुख्यमंत्री द्वारा आवंटन से पहले इसे क्यों नहीं सुलझाया गया?

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