यूपी में अब मजदूरों को भी ज्वाइनिंग लेटर-सैलरी स्लिप देना होगा अनिवार्य, PF, ग्रेच्युटी और बोनस में होगा इजाफा

उत्तर प्रदेश में मई महीने में चार नई श्रम सहिंताएं लागू होंगी. पहली बार इसमें गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (जैसे डिलीवरी व एप आधारित कामगार) को शामिल किया गया है. इसके लागू होने के बाद मजदूरों को भी नियुक्ति पत्र और सैलरी स्लिप नियोक्ताओं की तरफ से देना जरूरी होगा.

यूपी में लागू होंगी चार नई श्रम सहिंताएं

योगी सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज कर दी है.ये संहिताएं 29 पुराने श्रम कानूनों को प्रतिस्थापित कर, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, वेतन में समानता, और गिग वर्कर्स सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए हैं.फिलहाल इसे हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए इसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है. सुझावों के आधार पर अंतिम नियमों को प्रदेश में मई महीने में लागू कर दिया जाएगा.

पीएफ , ग्रेच्युटी और बोनस में इजाफा होगा

चार नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद कर्मचारी के कुल वेतन (सीटीसी) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा बेसिक सैलरी यानी मूल वेतन माना जाएगा. इससे कर्मचारी के पीएफ , ग्रेच्युटी और बोनस में इजाफा होगा. पहली बार सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है. केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी. इससे कम वेतन राज्यों की तरफ से तय नहीं किए जाएगा.

महीने की 7वीं तारीख तक वेतन का भुगतान अनिवार्य

अब कर्मचारियों को वेतन का भुगतान महीने की 7वीं तारीख तक करना अनिवार्य होगा. ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान आवश्यक होगा. समान कार्य के लिए समान वेतन होगा. इसमें लिंग, जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव समाप्त होगा. छंटनी और हड़ताल के लिए भी नए नियम आएंगे. 300 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी. पहले यह सीमा 100 श्रमिकों की थी.

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी मिलेगा लाभ

ये चार नई श्रम संहिताओं गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (जैसे डिलीवरी व एप आधारित कामगार) को भी कवर करेंगी.यह पहली बार होगा. कार्यस्थल पर आने-जाने के दौरान दुर्घटना भी कार्य से जुड़ी मानी जाएगी. अगर नियमों को नहीं माना जाता है तो सरकार द्वारा कंपनियों पर 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा जा सकता है.

बदल जाएंगे ये नियम

सरकार ने 300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में नोटिस और मुआवजा जरूरी कर दिया है. हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस देना भी आवश्यक है. 20 से अधिक श्रमिकों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति बनाना होगा. छंटनी की स्थिति में ‘री-स्किलिंग फंड’ में 15 दिन का वेतन जमा करना होगा. 8 घंटे का कार्यदिवस होगा.सप्ताह में कुल 48 घंटे की कार्यसीमा होगा.मजदूरों को भी नियुक्ति पत्र और सैलरी स्लिप नियोक्ताओं की तरफ से देना जरूरी होगा.

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