26 मई को खत्म हो रहा कार्यकाल, 10 जून को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट; कब होंगे UP में पंचायत चुनाव?
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति है. मौजूदा कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 जून को होगा. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा संशोधित अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे. इस देरी से कार्यकाल का विस्तार होना तय माना जा रहा है. अब सवाल है कि यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब होंगे?
राज्य निर्वाचन आयोग की संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है. इस अधिसूचना के तहत अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाश 10 जून को होगा. चूंकि उत्तर प्रदेश में पंचायत का कार्यकाल 26 मई को ही खत्म हो रहा है, इसलिए यह तो तय हो गया कि समय रहते चुनाव नहीं हो सकेंगे, लेकिन एक सवाल भी खड़ा हो गया कि आखिर ये चुनाव कब होंगे? इस अधिसूचना के आने के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की पूरी समय-सारिणी ही उलट-पुलट हो गई है.
चुनाव आयोग के नए कार्यक्रम के मुताबिक अंतिम मतदाता सूची 10 जून 2026 को ही प्रकाशित होगी, जबकि तीनों स्तरों (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) के मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है. चुनावी प्रक्रिया शुरू करने से पहले मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अनिवार्य है. जिसके बाद नामांकन, मतदान केंद्रों की व्यवस्था, प्रतीक आवंटन और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं. माना जा रहा है कि इन परिस्थितियों में पंचायतों का कार्यकाल बढ़ना तय है.
ये है चुनाव आयोग की अधिसूचना
- 21 अप्रैल से 28 मई 2026: मतदाता सूची में डुप्लीकेशन हटाने, कंप्यूटरीकरण और सत्यापन
- 29 मई से 9 जून 2026: मतदान केंद्रों का निर्धारण, वार्ड मैपिंग और सूची का फाइनलाइजेशन
- 10 जून 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
इस लिए बढ़ाई गई अवधि
आयोग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग बीते कुछ वर्षों में मतदाता सूची की शुद्धिकरण पर जोर दे रहा है. इसमें डुप्लीकेशन और मृत लोगों के नाम हटाने का काम तेजी से चल रहा था. इसकी वजह से फाइनल मतदाता सूची तैयार करने में समय लग रहा है. इसकी वजह से समय सीमा बढ़ाने के साथ आयोग को संशोधित अधिसूचना जारी करनी पड़ी है. बता दें कि मौजूदा ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है. इसी तारीख से वे अपने पद से मुक्त हो जाएंगे.
अब ये है विकल्प
कार्यकाल खत्म होने के बाद या तो आयोग को चुनाव की नई तारीखों की घोषणा करनी होगी या फिर अंतरिम व्यवस्था पर विचार करना होगा. राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार जानबूझकर देरी कर रही है, जबकि सत्ताधारी दल इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं. उत्तर प्रदेश में लगभग 58,000 ग्राम पंचायतों, 825 क्षेत्र पंचायतों और 75 जिला पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जाते हैं. इन चुनावों में करोड़ों मतदाता हिस्सा लेते हैं और ग्रामीण स्तर पर सत्ता का समीकरण तय होता है. जून के अंत या जुलाई के पहले पखवाड़े में चुनाव कराने की तैयारी चल रही है.