राम मंदिर के दान में कथित घोटाले का मामला पहुंचा HC, जनहित याचिका में CBI जांच की मांग
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है. कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन के आरोपों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच जरूरी है.
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और अन्य संपत्तियों के कथित गबन के आरोप अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गए हैं. इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. पिछले दिनों ही राम मंदिर की सेवा में लगे पदाधिकारियों पर चंदे के पैसे का गबन करने का आरोप लगा था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पूरा मामला क्या है और अब आगे क्या हो सकता है?
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में दानपात्रों के माध्यम से बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं. इसी बीच मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित दुरुपयोग और गबन के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. अब यह मामला सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ तक पहुंच गया है. यहां पर जनहित याचिका दाखिल की गई है.
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निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग
स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक ने व्यक्तिगत हैसियत से जनहित याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं की आशंका है. याचिका में पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, मंदिर में चढ़ावे को लेकर आ रही खबरों से विश्वास टूटता है.
‘जनता के सामने सच्चाई आनी चाहिए’
जनहित याचिका कहा गया, ‘ऐसे में यदि दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न होता है तो उसकी पारदर्शी जांच होना आवश्यक है. याचिका में कहा गया है कि जनता के सामने सच्चाई आनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके.’ राम मंदिर को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज है. मंदिर के चढ़ावे और धन प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
वित्तीय गड़बड़ी से मंदिर ट्रस्ट का इनकार
हालांकि मंदिर ट्रस्ट की ओर से अभी तक किसी वित्तीय गड़बड़ी को स्वीकार नहीं किया गया है. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार यह दावा करता रहा है कि मंदिर से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन निर्धारित प्रक्रियाओं और ऑडिट व्यवस्था के तहत संचालित किए जाते हैं. ट्रस्ट का कहना है कि दान की राशि का उपयोग मंदिर निर्माण, श्रद्धालु सुविधाओं और अन्य धार्मिक कार्यों में किया जा रहा है. खैर अब मामला हाई कोर्ट में पहुंच गया है.
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है. एक ओर सीबीआई जांच की मांग उठ रही है तो दूसरी ओर ट्रस्ट की पारदर्शिता पर बहस तेज है. अब सभी की नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर है, जहां से इस पूरे मामले की दिशा तय हो सकती है.