राम मंदिर दान विवाद: नृपेंद्र मिश्रा बोले- यह दूसरी चेतावनी है, अंतिम मौका समझिए…

टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि दानपात्र विवाद को 'दूसरी चेतावनी' की तरह लिया जाना चाहिए. उन्होंने माना कि काउंटिंग रूम की निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता को और मजबूत करने की जरूरत है. नृपेंद्र मिश्रा ने खुलासा किया कि सोना-चांदी के प्रबंधन के लिए मिंट कॉरपोरेशन की व्यवस्था का प्रस्ताव पहले दिया गया था, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया.

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा

अयोध्या के राम मंदिर में दानपात्र से कथित धनराशि गायब होने के मामले ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पहली बार राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी बात रखी है. टीवी9 भारतवर्ष को दिए इंटरव्यू में उन्होंने न केवल जांच प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को स्वीकार किया, बल्कि यह भी कहा कि मंदिर परिसर में हुई किसी भी छोटी घटना को भी बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

नृपेंद्र मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, ऐसे में ‘घोटाला’ जैसे शब्द का इस्तेमाल अपने आप में बेहद गंभीर है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक जो जानकारी सामने आई है, वह शुरुआती स्तर की है और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा. आइए जानते हैं कि टीवी9 से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने कथित चंदा चोरी की घटना को लेकर क्या-क्या खुलासे किए?

‘छोटी घटना भी बड़ी चिंता का विषय’

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु विश्वास और भक्ति की भावना से आता है, ऐसे में अगर किसी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा भी होती है तो वह चिंता का विषय बन जाती है. उन्होंने कहा कि वह अक्सर दर्शन के लिए आने वाले लोगों से पूछते हैं कि उन्हें कोई परेशानी तो नहीं हुई, ज्यादातर श्रद्धालुओं का जवाब होता है कि ‘भगवान के दर्शन में कैसी परेशानी?’ लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यवस्थागत कमियों को नजरअंदाज किया जाए.

काउंटिंग रूम पर उठे सवाल

नृपेंद्र मिश्रा ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि दानपात्रों की गिनती वाले काउंटिंग रूम की निगरानी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि काउंटिंग रूम में लगभग 44 लोग काम करते हैं, जिनमें अधिकांश दैनिक सेवा से जुड़े कर्मचारी हैं. ऐसी व्यवस्था में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी बेहद आवश्यक है ताकि किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे.

उनके मुताबिक, शुरुआती जानकारी के अनुसार कुछ नकदी मंदिर परिसर के एक हिस्से में स्थित टॉयलेट के पास मिली थी. इसकी सूचना मिलने के बाद ट्रस्ट महासचिव चंपत राय मौके पर पहुंचे और आंतरिक चर्चा के बाद राज्य सरकार से एसआईटी जांच का अनुरोध किया गया.

दानपात्र और रसीद वाले दान में अंतर

नृपेंद्र मिश्रा ने दान व्यवस्था को दो हिस्सों में बांटकर समझाया. पहला, वह दान जो श्रद्धालु रसीद लेकर करते हैं, उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है और धनराशि सीधे बैंक में जमा होती है. दूसरा, दानपात्र में डाले जाने वाले रुपये, सिक्के और बहुमूल्य धातुएं… श्रद्धालु भगवान के चरणों में सोना-चांदी के आभूषण भी अर्पित करते हैं, ऐसे दान का लेखा-जोखा काउंटिंग प्रक्रिया के दौरान तैयार होता है. यही वह हिस्सा है, जिसको लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि दानपात्र से निकली वस्तुओं का रिकॉर्ड बाद में बनता है, तो उसकी पारदर्शिता सुनिश्चित कैसे की जाए.

‘संभव है मौका न मिलने पर पैसे छोड़ दिए गए हों’

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि बाहरी लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि जो व्यक्ति धनराशि बाहर ले जाना चाहता था, उसे अवसर नहीं मिला और उसने रकम टॉयलेट के पास छोड़ दी होगी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल संभावनाओं पर आधारित चर्चा है और वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी. चंपत राय के सवाल पर नृपेंद्र मिश्रा ने उनका बचाव किया और कहा कि चंपत राय, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं, उन्होंने हर परिस्थिति का सामना किया है, उनका कोई बैंक अकाउंट तक नहीं है, मैं नहीं मानता कि अगर ऐसी कोई घटना हुई है तो वह उसमें शामिल होंगे.

उन्होंने कहा कि चंपत राय प्रबंधन के प्रमुख हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से लोग उनसे सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन इससे उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता.

‘800 सीसीटीवी कैमरे हैं, फिर चूक कैसे हुई?’

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर परिसर में लगभग 800 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, एक कंट्रोल रूम भी संचालित होता है, जिसकी निगरानी पुलिस करती है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि यदि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना का पता चला है, तो इसका मतलब यह भी है कि निगरानी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही थी. उन्होंने कहा, ‘अगर काउंटिंग रूम में सीसीटीवी लगे थे और फिर भी ऐसी स्थिति बनी, तो निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है.’

जमीन खरीद विवाद पर भी बोले

नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद प्रक्रिया को लेकर पहले उठे विवादों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह ‘पहली चेतावनी’ थी. उनके अनुसार, ‘जमीन खरीद में जिस स्तर की सावधानी बरती जानी चाहिए थी, वह नहीं बरती गई… अगर प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होती तो बेहतर होता.’ उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में बड़ी मात्रा में नजूल भूमि होने के कारण जमीन खरीदना आसान नहीं था, लेकिन इसके बावजूद और अधिक सतर्कता बरती जा सकती थी.

‘यह दूसरी चेतावनी है’

दान विवाद को लेकर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, ‘जमीन खरीद पहला संकेत था… अब यह दूसरा संकेत है और इसे अंतिम चेतावनी की तरह लिया जाना चाहिए.’ नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि सोना-चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं के प्रबंधन के लिए भारत सरकार के अधीन कार्य करने वाले मिंट कॉरपोरेशन के साथ व्यवस्था प्रस्तावित थी. उन्होंने कहा कि तिरुपति मंदिर में भी यही संस्था बहुमूल्य धातुओं का सत्यापन, पैकेजिंग और प्रसंस्करण करती है. राम मंदिर के लिए भी तीन वर्ष पहले मिंट अधिकारियों ने व्यवस्था का प्रारूप दिया था, लेकिन यह प्रस्ताव लागू क्यों नहीं हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है.

एफआईआर क्यों नहीं?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब धनराशि मिलने की बात सामने आई तो तत्काल एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई? इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि अगर पहले दिन एफआईआर दर्ज होती तो वह अधूरी होती, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि मामला किसके खिलाफ दर्ज किया जाए. उनके मुताबिक, ट्रस्ट ने सोचा कि राज्य सरकार से एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया जाए ताकि वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तथ्यात्मक जांच हो सके.

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, ‘एफआईआर होती तो थाने की पुलिस जांच करती. अब वरिष्ठ अधिकारी जांच कर रहे हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई हो सकती है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी है. यह टीम पूरे प्रकरण की जांच करेगी और सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी.

क्या चंपत राय को दूर किया जा रहा है?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे में चंपत राय की जगह प्रतिनिधि की उपस्थिति की चर्चाओं पर भी नृपेंद्र मिश्रा ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इसे जांच से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, ‘चंपत राय अस्वस्थ हैं… ऐसा बिल्कुल नहीं है कि उन्हें किसी दोष के कारण दूर रखा जा रहा है.’

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