राम मंदिर ट्रस्ट में होगी CEO की एंट्री? नृपेंद्र मिश्र ने भी की वकालत, जानें क्या है उनका तर्क

राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की भी एंट्री हो सकती है.सरकार इसपर गंभीरता से विचार कर रही है. राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी इसकी वकालत की है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के धार्मिक केंद्र के सुचारु संचालन और बेहतर प्रबंधन के लिए जल्द से जल्द एक अनुभवी और सक्षम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या विशेष कार्याधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए.

अयोध्या स्थित राम मंदिर Image Credit: AI Generated

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले के बाद अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव हो सकता है. केंद्र और राज्य स्तर पर ट्रस्ट में एक अनुभवी और बेदाग छवि वाले सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जा सकता है. इसपर गंभीरता से विचार भी किया जा रहा है.इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का भी परीक्षण शुरू हो गया है.

राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. ऐसे में हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण ने न केवल ट्रस्ट की कार्यप्रणाली बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं. माना जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि में सरकार मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. यही वजह है कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति का फैसला लिया जा सकता है.

नृपेंद्र मिश्र का भी इसपर आया बयान

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का इसको लेकर एक अहम बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि राम मंदिर जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के धार्मिक केंद्र के सुचारु संचालन और बेहतर प्रबंधन के लिए जल्द से जल्द एक अनुभवी और सक्षम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या विशेष कार्याधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए, जिसे प्रशासनिक कार्यों में पर्याप्त स्वतंत्रता भी प्राप्त हो.

एक मीडिया हाउस से बातचीत में नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि यदि किसी धार्मिक संस्था के प्रबंधन पर सवाल उठते हैं तो उससे जुड़े सभी लोगों को स्वाभाविक रूप से पीड़ा होती है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

नृपेंद्र मिश्र ने भूमि खरीद विवाद का भी किया जिक्र

उन्होंने पूर्व में सामने आए भूमि खरीद विवाद का भी उल्लेख किया. मिश्र ने कहा कि उस मामले के बाद ट्रस्ट की बैठक में विस्तृत चर्चा हुई थी और भविष्य में भूमि खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था. उनके अनुसार वह घटना एक चेतावनी थी कि यदि व्यवस्थाओं में पारदर्शिता नहीं रखी जाएगी तो भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

दानराशि गबन के मौजूदा मामले को पहले के विवादों की तुलना में अधिक गंभीर बताते हुए नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि निर्धारित समय सीमा में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उन्होंने भरोसा जताया कि जांच के दौरान सभी तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी.

राम मंदिर के बढ़ते वैश्विक महत्व का उल्लेख करते हुए मिश्र ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सनातन धर्म का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है. ऐसे में यहां का प्रशासन और प्रबंधन देश के अन्य प्रमुख धार्मिक संस्थानों के मुकाबले सर्वोच्च स्तर का होना चाहिए.

सीईओ की नियुक्ति को लेकर नृपेंद्र मिश्र का तर्क

उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर के दैनिक संचालन, प्रशासनिक निर्णयों और प्रबंधन संबंधी कार्यों के लिए एक अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो ट्रस्ट के अधीन कार्य करे लेकिन उसे निर्णय लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता भी मिले. उनका मानना है कि इससे व्यवस्थाओं में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेंगी

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी पूंजी श्रद्धालुओं का विश्वास होता है. राम मंदिर के प्रति देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. इसलिए मंदिर प्रबंधन को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए संस्थागत सुधारों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है.

क्या बदलेगा ट्रस्ट का ढांचा?

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 15 सदस्यीय संस्था है. इसमें 12 सदस्य मनोनीत हैं जबकि तीन सदस्य पदेन हैं, जिनमें केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि और अयोध्या के जिलाधिकारी शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रस्ट में पहले से रिक्त चल रहे एक ट्रस्टी पद पर किसी प्रशासनिक अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा या फिर मुख्य कार्यपालक अधिकारी का नया पद बनाया जाएगा. यदि नया पद बनाया जाता है तो ट्रस्ट की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 16 हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ था गठन

9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था. इसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में की थी. ट्रस्ट के गठन के समय मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष तथा विहिप के वरिष्ठ नेता चंपतराय को महासचिव बनाया गया था. बाद में विभिन्न संतों, विद्वानों और स्थानीय प्रतिनिधियों को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया.

वर्तमान में ट्रस्ट का एक पद रिक्त है. ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनकी जगह पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को शामिल किया गया, लेकिन अयोध्या राजपरिवार के प्रमुख और ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद से एक स्थान अभी भी खाली है.

देश के बड़े मंदिरों में पहले से हैं प्रशासनिक अधिकारी

राम मंदिर में CEO नियुक्ति का विचार नया नहीं है. देश के कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में संचालन की कमान रहती है.वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) मंदिर प्रशासन, विकास परियोजनाओं और वित्तीय प्रबंधन की निगरानी करते हैं.

उत्तराखंड के चारधाम से जुड़े इस प्रतिष्ठित संस्थान में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका निभाते हैं और मंदिरों की व्यवस्था तथा संसाधनों का संचालन संभालते हैं.जम्मू-कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी CEO के रूप में कार्य करते हैं. तीर्थ प्रबंधन से लेकर वित्तीय अनुश्रवण तक की जिम्मेदारी उनके पास होती है.

देश के सबसे समृद्ध मंदिर संस्थानों में शामिल तिरुपति बालाजी मंदिर का संचालन सरकार द्वारा नियुक्त कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से होता है. करोड़ों रुपये के दान और विशाल व्यवस्थाओं का संचालन पेशेवर प्रशासनिक ढांचे के तहत किया जाता है.

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर को मिलने वाला दान और चढ़ावा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में वित्तीय प्रबंधन, लेखा परीक्षण, निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है. सरकार का मानना है कि अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति से मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी.

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच अभी जारी है, लेकिन इसके समानांतर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में संभावित बदलाव यह संकेत दे रहे हैं कि सरकार अब देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में से एक के प्रबंधन को और अधिक संस्थागत एवं पेशेवर स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

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