पहले छात्राओं ने किया सड़क जाम, अब पूर्व छात्र पर FIR; सर्वोदय विद्यालय का विवाद गहराया

लखनऊ के जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में शिक्षकों की कमी और भोजन को लेकर छात्राओं में नाराजगी है. लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद अब एक पूर्व छात्र पर FIR दर्ज की गई है, जिससे विवाद और गहरा गया है. यह प्रकरण अब राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले चुका है.

लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान छात्राएं (फाइल फोटो) Image Credit:

लखनऊ में दुबग्गा के पारा स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में अव्यवस्थाओं को लेकर शुरू हुआ छात्र-छात्राओं का आंदोलन अब नए विवाद में बदलता जा रहा है. शिक्षकों की कमी, भोजन की गुणवत्ता और इलाज जैसी सुविधाओं को लेकर छात्राओं के लगातार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही हैं. इस बीच अब विद्यालय से जुड़े एक पूर्व छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला और गरमा गया है.

दरअसल, विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों की कमी समेत कई समस्याओं को लेकर छात्र-छात्राएं नाराज हैं. 14 अगस्त को विद्यार्थियों ने आगरा एक्सप्रेसवे लिंक रोड जाम कर दिया था. इसी दौरान समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण का काफिला भी जाम में फंस गया. मंत्री ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की और समाधान का भरोसा दिया था.

मंत्री के आश्वासन के बाद फिर से सड़क जाम

हालांकि, मंत्री के आश्वासन के बाद भी छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ. 17 अगस्त को छात्राएं बाहर निकलकर दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे तक पहुंच गईं और मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन किया. बारिश के बावजूद छात्राओं ने मानव शृंखला बनाकर सड़क जाम कर दी. करीब ढाई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई.

छात्राओं की मांग थी कि विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की जाए और भोजन, इलाज तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुधारी जाए. छात्राएं डीएम को मौके पर बुलाने की मांग पर भी अड़ी रहीं. इस दौरान वह सीएम से मिलने की जिद्द लेकर मुख्य़मंत्री आवास की तरफ बढ़ने लगी थीं. बाद में अधिकारियों के समझाने पर वे विद्यालय वापस लौटीं.

लगातार दो प्रदर्शनों के बाद उठे कई सवाल

अब पूर्व छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पूरे प्रकरण ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है. छात्राओं की मूल समस्याओं के समाधान के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई भी चर्चा का विषय बन गई है. लगातार दो प्रदर्शनों के बाद प्रशासन और समाज कल्याण विभाग की विद्यालय व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं. प्रदेश के सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली हैं, जिसका असर पढ़ाई पर पड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं.

आश्वासन के बाद भी क्यों नहीं थमा गुस्सा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार और विभाग ने छात्रों की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था तो कुछ ही दिनों में छात्राओं को दोबारा सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी?

अब पूर्व छात्र पर एफआईआर के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है. एक तरफ छात्र अपनी मूल समस्याओं शिक्षकों की कमी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस कार्रवाई ने विवाद और बढ़ा सकता है. अब प्रशासन के सामने समस्याओं का स्थायी समाधान करने और पूरे मामले को शांत करने की चुनौती है.

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