सर्दियों से पहले विधानसभा, फिर कब होंगे पंचायत चुनाव? यहां समझें UP में इलेक्शन की पूरी गणित
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टल गए हैं, लेकिन अब विधानसभा चुनाव समय से पहले हो सकते हैं. जनगणना के कारण, चुनाव आयोग नवंबर-जनवरी में विधानसभा चुनाव करा सकता है ताकि राष्ट्रपति शासन से बचा जा सके. राजनीतिक दल अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं, हालांकि दिसंबर-जनवरी की ठंड से बचने के लिए नवंबर में ही चुनाव की संभावना अधिक है. इससे पंचायत चुनाव अगले साल मई तक टल सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन जरूरी तैयारियों के अभाव में पंचायत चुनाव टाल दिया गया है. उत्तर प्रदेश विधानसभा का भी कार्यकाल अगले साल मई में खत्म हो रहा है. चूंकि उसी समय जनगणना का विशेष अभियान शुरू होने वाला है, ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या विधानसभा चुनाव भी टलेगा? शायद ऐसा करना संभव नहीं होगा. कारण कि ऐसा करने पर उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना होगा.
ऐसी परिस्थिति में चुनाव आयोग के पास विकल्प है. वह विकल्प यह है कि कार्यकाल खत्म होने के छह महीने के पहले आयोग कभी भी विधानसभा चुनाव करा सकता है. इसके लिए संसद से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी. जनगणना विभाग पहले ही चुनाव आयोग को सूचित कर चुका है कि फरवरी से अप्रैल तक विशेष अभियान शुरू होना है. चूंकि जनगणना में भी वही मशीनरी इस्तेमाल होनी है, जो चुनाव में होनी है, ऐसे में चुनाव आयोग जनगणना का अभियान शुरू होने से पहले चुनाव कराने का फैसला कर सकता है.
तैयारी में जुटे राजनीतिक दल
संभावित स्थिति को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. राजनीतिक हलके में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी ने तो 50 फीसदी से अधिक सीटों के लिए उम्मीदवार भी तय कर लिए हैं. इन उम्मीदवारों को दल बल के साथ मैदान में भी उतार दिया गया है. कुछ यही स्थिति बहुजन समाज पार्टी की भी है. इसी प्रकार सत्तारुढ बीजेपी और उसके सहयोगी दल भी मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं.
कब हो सकते हैं विधानसभा चुनाव?
जानकारों के मुताबिक यह तो तय हो चुका है कि जनगणना अभियान शुरू होने से पहले विधानसभा चुनाव करा लिए जाने हैं. इस हिसाब से नवंबर से जनवरी तक का समय चुनाव के लिए उपयुक्त माना जा रहा है. लेकिन इसमें भी दिक्कत यह है कि दिसंबर जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ेगी, घना कोहरा भी होगा. ऐसे में हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में राजनीतिक दलों के टॉप कंपेनर कई इलाकों में नहीं जा सकेंगे. इन परिस्थितियों में माना जा रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल चुनाव के लिए दिसंबर-जनवरी की सहमति नहीं देगा. ऐसे में चुनाव नवंबर महीने में कराए जाने की पूरी संभावना है.
और लटक सकते हैं पंचायत चुनाव
यदि विधानसभा चुनाव नवंबर में कराए जाते हैं तो इन चुनावों के तत्काल बाद जनगणना का अभियान शुरू हो जाएगा. यह अभियान अप्रैल में खत्म होगा. इन परिस्थितियों में पंचायत चुनाव अगले साल मई में ही संभव जान पड़ते हैं. पंचायत चुनावों की डेट आगे बढ़ाने में सरकार को कोई दिक्कत भी नहीं है, क्योंकि पहले ही प्रधानों को अगले चुनाव तक के लिए प्रशासक नियुक्ति किया जा चुका है.
किसको फायदा, किसे नुकसान?
यदि समय पूर्व चुनाव होते हैं तो एक सवाल भी उठ रहा है कि इससे किसे फायदा होगा और किसको नुकसान होगा? इस सवाल का जवाब खंगालने पर पता चलता है कि हाल ही में दो राज्यों में परचम फहराने के बाद बीजेपी यूपी चुनाव को लेकर भी काफी उत्साहित है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव के लिए हमेशा तैयार हैं. उधर, पहले से ही चुनाव की तैयार में जुटी सपा का भी दावा है कि इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं होने वाली. पूर्व में हुए अर्ली पोल्स के आंकड़े देखने से पता चलता है कि यह परिस्थिति हमेशा सत्ताधारी दल के लिए नुकसानदेह रही है.