‘महाप्रभु जगन्नाथ ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश को एक सूत्र में पिरोया’, बोले ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में इस्कॉन मंदिर द्वारा आयोजित भगवान श्रीजगन्नाथ जी महाराज की भव्य रथयात्रा में भाग लिया. उन्होंने कहा कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश को एकता के सूत्र में बांधने का संदेश दिया है. ब्रजेश पाठक ने रथ का संचालन किया और श्रद्धालुओं के साथ सफाई सेवा में भी हिस्सा लिया. उन्होंने मानव जीवन के सदुपयोग, सेवा, भक्ति और जरूरतमंदों की सहायता का संदेश दिया.
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को लखनऊ के गोल्फ सिटी स्थित इस्कॉन मंदिर द्वारा आयोजित भगवान श्रीजगन्नाथ जी महाराज की भव्य रथयात्रा में शामिल होकर पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने कहा कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है और उनका संदेश पूरे राष्ट्र को एकता, सेवा और भक्ति का मार्ग दिखाता है.
चारबाग स्थित रविंद्रालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि भगवान जगन्नाथ पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं. उन्होंने बताया कि ‘जगन्नाथ’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘जगत’ और ‘नाथ’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पूरे संसार के स्वामी. उन्होंने कहा कि महाप्रभु की कृपा सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहती है और उनके आशीर्वाद से समाज में प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना मजबूत होती है.
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि मानव जीवन बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इसका सदुपयोग करना चाहिए. उन्होंने लोगों से जरूरतमंदों की सहायता करने, समाज सेवा करने और भगवान के प्रति श्रद्धा बनाए रखने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सेवा और भक्ति ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है.
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस्कॉन मंदिर की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर के माध्यम से संत-महात्माओं के सान्निध्य में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से जोड़ने का कार्य करते हैं.
रथयात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री डिप्टी सीएम ने भगवान श्रीजगन्नाथ के रथ का संचालन भी किया. इसके साथ ही उन्होंने रथयात्रा मार्ग पर स्वयं सफाई सेवा में भाग लेकर श्रमदान किया. उन्होंने कहा कि सेवा का भाव ही सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है और ऐसे आयोजनों में जनभागीदारी समाज को नई दिशा देती है. रथयात्रा के दौरान भक्ति संगीत, कीर्तन और जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए पहुंचे और रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया.