UP पुलिस का NCL सिस्टम लागू, अब एक क्लिक में दिखेगी हर केस की जांच रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश पुलिस की नई डिजिटल व्यवस्था 'एनसीएल पोर्टल' लागू कर दी गई है. अब अधिकारियों को जांच प्रगति के लिए विवेचक को फोन नहीं करना पड़ेगा. पोर्टल एक क्लिक पर पूरी स्थिति दिखाएगा. इसमें ई-साक्ष्य अपलोड होंगे, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और पीड़ितों को भी मदद मिलेगी.

डीजीपी राजीव कृष्ण (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश पुलिस ने विवेचनाओं की निगरानी को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. यूपी में एनसीएल (New Criminal Law Monitoring System) पोर्टल लागू कर दिया गया है, जिसके जरिए एक क्लिक में किसी भी विवेचना की पूरी स्थिति देखी जा सकेगी.  अब विवेचक (IO) को फोन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर प्रदेशभर में इसकी समीक्षा शुरू हो गई है. आगरा कमिश्नरेट में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने एसीपी और थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था की जानकारी दी. उन्होंने लंबित विवेचनाओं की समीक्षा करते हुए पूछा कि किस थाने में कितनी विवेचनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी होनी हैं.

इसी पोर्टल के आधार पर होगी थानों की रैंकिंग

नियम के अनुसार गंभीर अपराधों की विवेचना 90 दिन और सामान्य मामलों की 60 दिन में पूरी करनी होती है. समय सीमा पार होने पर मामला डिफॉल्टर श्रेणी में चला जाता है. नई व्यवस्था के तहत विवेचक को हर मामले में ई-साक्ष्य अपलोड करना होगा. इसमें घटनास्थल का वीडियो, वादी और गवाहों के बयान सहित अन्य जरूरी डिजिटल रिकॉर्ड शामिल होंगे.

अधिकारियों ने पाया कि कई मामलों में वीडियो की गुणवत्ता खराब थी या जरूरी बयान अपलोड नहीं किए गए थे. ऐसे मामलों में अब सीधे ऑनलाइन नोटिस जारी किए जाएंगे. डीसीपी सिटी ने कहा कि आने वाले समय में जिलों के साथ-साथ थानों की रैंकिंग भी इसी पोर्टल के आधार पर होगी. खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की जा सकती है.

इस नई प्रणाली से पीड़ितों को भी फायदा मिलेगा

उत्तर प्रदेश पुलिस की इस प्रणाली से पीड़ितों को भी फायदा मिलेगा. यदि कोई व्यक्ति आरोप लगाता है कि उसका बयान दर्ज नहीं किया गया या बदल दिया गया है, तो पोर्टल पर उपलब्ध वीडियो और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए जांच की पूरी प्रक्रिया की पुष्टि की जा सकेगी. इससे विवेचना में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी तय होगी.

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