आवासीय भवनों में नहीं होंगी व्यवासयिक गतिविधियां! लखनऊ अग्निकांड के बाद एक्शन में सरकार
लखनऊ अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्त हो गई है. योगी सरकार ने घोषणा की है कि किसी भी शहर में आवासीय परिसरों में होटल, गोदाम या दुकानें नहीं चलेंगी. ऐसे पाए जाने पर भवन मालिक और संबंधित अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज होगी, साथ ही सीलिंग व बुलडोजर कार्रवाई भी की जाएगी.
लखनऊ अग्निकांड पर सबक लेते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बड़े एक्शन की तैयारी में है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी शहर में आवासीय भवनों में व्यवसायिक गतिविधियां नहीं हो सकेंगी. जहां कहीं भी ऐसा पाया जाएगा, संबंधित भवन मालिक के साथ संबंधित प्राधिकरण के संबंधित जेई के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी. सरकार ने यह फैसला सभी प्राधिकरण के उपाध्यक्षों के साथ हुई बैठक में सुना दिया है.
इस संबंध में रविवार को प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने सभी प्राधिकरण उपाध्यक्षों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की. इस बैठक में सभी 29 विकास प्राधिकरणों और चार विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष मौजूद रहे. इसमें उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों की लिस्ट बनाने को कहा. इसी के साथ उन्होंने पुलिस और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर एक्शन भी शुरू करने के निर्देश दिए हैं.
इन प्रतिष्ठानों पर होगा एक्शन
प्रमुख सचिव ने कहा कि अलीगंज अग्निकांड जैसी घटनाएं आवासीय भवनों के नियम विरुद्ध इस्तेमाल का परिणाम हैं. ऐसे में आवासीय भवनों में चल रहे होटल, गोदाम, कोचिंग सेंटर, क्लीनिक और दुकानों को तत्काल प्रभाव से सील करने की जरूरत है. उन्होंने सभी प्राधिकरण उपाध्यक्षों को 15 दिन में सर्वे कराने और संबंधित को खुद व्यवसायिक गतिविधि बंद करने को कहने के साथ सरकार को सूचित करने को कहा है.
क्या होगा आगे?
प्रमुख सचिव ने कहा कि 15 दिन के बाद भी यदि किसी जोन में अवैध व्यावसायिक निर्माण या गतिविधि मिलती है तो इसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही वहां के प्रवर्तन अधिकारी की होगी. उन्होंने कहा कि 15 दिन के नोटिस के बाद ताबड़तोड़ सीलिंग और बुलडोजर कार्रवाई शुरू होनी चाहिए. इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट भी सरकार को भेजनी होगी. इस कार्रवाई के तहत पहले 15 दिनों में आवासीय भवनों में संचालित शोरूम, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, ऑफिस आदि की वार्ड-वार सूची बनेगी.
नक्शे के खिलाफ निर्माण पर एफआईआर
फिर नोटिस जारी कर भवन मालिक को खुद व्यावसायिक उपयोग बंद करने को कहा जाएगा. फिर 15 दिन बाद दोबारा सर्वे होगा. यदि इस सर्वे में व्यसायिक उपयोग पाया जाता है तो भवन को सील किया जाएगा. इस दौरान नक्शे के खिलाफ निर्माण पर खास फोकस किया जाएगा. इस तरह का निर्माण पाए जाने पर संबंधित थाने में एफआईआर कराई जाएगी. इस एफआईआर में संबंधित जेई को भी नामजद किया जाएगा.
