यूपी में सरकारी नौकरी के दरवाजे किनके लिए होंगे बंद? जानिए चरित्र सत्यापन के नए नियम

यूपी में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन की नई नीति जारी की गई है. इसमें आपराधिक इतिहास, लंबित मुकदमों और गलत जानकारी देने पर अयोग्यता और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. सरकार ने इसके लिए गंभीर अपराधों की 5 श्रेणियां तय कीं.

सीएम योगी (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन की नई नीति जारी की है. इसमें साफ किया गया है कि किन गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप तय होने पर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया सकता है, किन मामलों में दोषसिद्धि जरूरी होगी और किन परिस्थितियों में राहत मिलेगी.

मुख्य सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश में सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थियों के आपराधिक इतिहास, लंबित मुकदमों, दोषसिद्धि, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और सत्यापन के दौरान दी गई जानकारी को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं. यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकार के सभी विभागों, आयोगों और भर्ती बोर्डों पर लागू होगा. 

पुलिस और जिला प्रशासन करेंगे चरित्र सत्यापन

नई नीति के तहत नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी का पूरा विवरण पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) और संबंधित जिलाधिकारी को भेजेगा. अभ्यर्थी जिस जिले का गृह निवासी है, वहां के जिलाधिकारी के साथ उन जिलों से भी सत्यापन कराया जाएगा, जहां अभ्यर्थी जांच की तारीख से पिछले पांच वर्षों के दौरान एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो.

जिलाधिकारी जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट प्राप्त करेंगे. जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई अपने उपलब्ध अभिलेखों की जांच कर यह बताएगी कि अभ्यर्थी के खिलाफ कोई प्रतिकूल तथ्य है या नहीं. सामान्य मामलों में अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ करना, उसकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य करना या अतिरिक्त दस्तावेज मांगना आवश्यक नहीं होगा.

30 दिन में रिपोर्ट, देना होगा आपराधिक जानकारी

शासनादेश में चरित्र सत्यापन की समयसीमा भी तय की गई है. पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) और जिलाधिकारियों को संदर्भ प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सत्यापन रिपोर्ट संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी या विभाग को उपलब्ध करानी होगी. यदि निर्धारित अवधि में रिपोर्ट नहीं मिलती है तो नियुक्ति प्राधिकारी मामला उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग को भेजेगा.

नई नीति में अभ्यर्थियों के लिए आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य किया गया है. आवेदन पत्र, सत्यापन पत्र और स्वघोषणा पत्र में यह बताना होगा कि उन्हें कभी किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया है या नहीं, उनके खिलाफ अभियोजन चला है या नहीं और किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है या नहीं.

जानकारी छिपाने पर सरकारी सेवा के लिए अयोग्य

इसके अलावा अभ्यर्थी को अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर, आरोपपत्र, लंबित विचारण या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जानकारी देनी होगी. पूर्व सेवा से बर्खास्तगी और किसी आयोग या बोर्ड द्वारा अनुचित साधनों के इस्तेमाल के कारण परीक्षा या चयन से प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी भी देनी होगी.

यदि अभ्यर्थी अपने खिलाफ आपराधिक मामले या गिरफ्तारी की जानकारी छिपाता है और बाद में यह तथ्य सामने आता है, तो उसकी नियुक्ति निरस्त की जा सकती है. उसे सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित करने और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार अन्य दंडात्मक, दीवानी या कानूनी कार्रवाई करने का भी प्रावधान है.

गंभीर अपराधों की पांच श्रेणियों में तय होंगे नियम

शासनादेश में अपराधों और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को अलग-अलग 5 श्रेणियों में बांटा है. इसके आधार पर यह तय किया जाएगा है कि किन परिस्थितियों में सरकारी सेवा के लिए अभ्यर्थी अयोग्य होगा. श्रेणी-A में राज्य के खिलाफ अपराध, सेना से जुड़े अपराध, हत्या, आपराधिक मानव वध, दहेज मृत्यु, आत्महत्या के लिए उकसाना का मामला शामिल है.

इसके अलावा, गंभीर शारीरिक हमले, तेजाब हमला, फिरौती के लिए अपहरण, मानव तस्करी, बलात्कार और अन्य गंभीर यौन अपराध, साथ ही लूट, डकैती, रंगदारी, संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियां, भीड़ द्वारा हत्या, साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई धोखाधड़ी, डीपफेक, डमी अभ्यर्थी, फर्जी जाति, पेपर लीक और झूठे साक्ष्य गढ़ना भी शामिल हैं.

विशेष कानूनों के तहत अपराध भी शामिल

श्रेणी-B में NDPS एक्ट, आयुध अधिनियम की निर्दिष्ट धाराएं, सरकारी गोपनीयता कानून, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, आतंकवाद से संबंधित कानून, NIA अधिनियम की अनुसूची के अपराध, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, पॉक्सो, सूचना प्रौद्योगिकी की निर्दिष्ट धाराएं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धनशोधन निवारण अधिनियम शामिल हैं.

इसके साथ सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े केंद्रीय और उत्तर प्रदेश के कानून, सीमा शुल्क अधिनियम की निर्दिष्ट धारा, यूपी डकैती प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, जहरीली या मिलावटी शराब से मृत्यु अथवा चोट के मामलों से संबंधित आबकारी प्रावधान, गैंगस्टर कानून, गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून और गोवध निवारण कानून की निर्दिष्ट धाराएं भी शामिल हैं.

श्रेणी-C में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शामिल

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए), कोफेपोसा, आवश्यक वस्तु आपूर्ति बनाए रखने से संबंधित कानून, अवैध मादक पदार्थ व्यापार निवारण कानून तथा राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, विघटनकारी गतिविधियों और उग्रवाद से संबंधित निर्दिष्ट कानूनों के तहत की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां इस श्रेणी में रखी गई हैं.

हालांकि, इसके लिए शासनादेश में निर्धारित शर्तें पूरी होनी चाहिए. प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने के साथ सलाहकार बोर्ड से उसकी पुष्टि और सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी द्वारा आदेश को निरस्त नहीं किया जाना आवश्यक है.

श्रेणी D: दोषसिद्धि पर आधारित अयोग्यता

इस श्रेणी में आपराधिक षड्यंत्र, समाज में वैमनस्य फैलाने, राज्य की अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने, कुछ धार्मिक अपराधों, गंभीर चोट, अपहरण, यौन उत्पीड़न, पीछा करने, न्याय प्रक्रिया से जुड़े अपराधों, फरार अपराधी को शरण देने, संपत्ति संबंधी अपराधों, आर्थिक धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना, आगजनी और विवाह तथा दहेज से जुड़े निर्दिष्ट अपराध शामिल हैं.

इस श्रेणी में सामान्यतः दोषसिद्धि होने पर अयोग्यता लागू होगी, केवल आरोप तय होने से नहीं. अपील लंबित होने की स्थिति में भी निर्धारित नियम लागू होंगे. विशेष कानूनों के तहत कुछ अपराध, जैसे एनडीपीएस अधिनियम के निर्दिष्ट मामले, आयुध अधिनियम की कुछ धाराएं, विस्फोटक अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की निर्दिष्ट धाराएं और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के अपराध भी इस श्रेणी के दूसरे भाग में रखे गए हैं.

श्रेणी E: बार-बार अपराध करने वाले अभ्यर्थी

सरकार ने बार-बार अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी नियम तय किए हैं. इसके तहत यदि अभ्यर्थी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में दो या अधिक आरोपपत्र दाखिल हुए हों और उनमें कम से कम एक जांच की तारीख से पिछले तीन वर्षों के भीतर का हो, तो उसे अयोग्यता के दायरे में रखा जा सकता है.

एक ही घटना या लेनदेन से जुड़े मामलों और उसी घटना की क्रॉस एफआईआर को एक मामला माना जाएगा. कुछ परिस्थितियों में एक ही पक्ष, भूमि, संपत्ति, पारिवारिक या वैवाहिक विवाद से जुड़े मामलों की भी अलग-अलग गणना नहीं होगी. जिन मामलों में अभ्यर्थी बरी हो चुका हो, समझौते या लोक अदालत के जरिए निस्तारण हो गया हो, उन्हें निर्धारित शर्तों के तहत गणना से बाहर रखा जाएगा.

किन परिस्थितियों में नहीं माना जाएगा अयोग्य?

शासनादेश में कुछ अपवाद भी निर्धारित किए गए हैं. केवल एफआईआर दर्ज होने, मामला विवेचनाधीन होने या आरोपपत्र दाखिल होने के बावजूद सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय नहीं किए जाने की स्थिति में अभ्यर्थी को अपने आप अयोग्य नहीं माना जाएगा. यह अपवाद श्रेणी A और B के मामलों में भी लागू होगा. श्रेणी D में दोषसिद्धि होने तक अयोग्यता नहीं होगी.

अदालत से अंतिम रूप से दोषमुक्त होने, लोक अदालत में आपसी समझौते से मामला निस्तारित होने, कानून के तहत शमन होने, अभियोजन वापस लिए जाने, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यवाही रद्द किए जाने या सक्षम अदालत द्वारा अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने जैसी स्थितियों में भी निर्धारित अपवाद लागू होंगे.

इसके अलावा कुछ छोटे अपराधों में भी राहत दी गई है. इनमें ऐसे असंज्ञेय या शमनीय अपराध, जिनमें केवल जुर्माना या सामुदायिक सेवा का प्रावधान हो, अधिकतम एक वर्ष तक की सजा वाले निर्दिष्ट अपराध, 10 हजार रुपये से कम मूल्य की संपत्ति से जुड़े कुछ अपराध और यातायात संबंधी उल्लंघन शामिल हैं, बशर्ते वे निर्धारित गंभीर अपराध श्रेणियों में न आते हों.

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