ब्रहर्षि देश से उत्तर प्रदेश तक… 76वीं वर्षगांठ पर जानें UP बनने की पूरी कहानी
उत्तर प्रदेश का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा है, जिसे कभी ब्रहर्षि देश कहा जाता था. संयुक्त प्रांत से 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के रूप में इसका नामकरण हुआ. आज यूपी दिवस पर हम इस राज्य के 76 गौरवशाली वर्षों का जश्न मनाते हैं. 2017 में राज्यपाल राम नाईक के सुझाव पर यह परंपरा शुरू हुई, जो राज्य की समृद्ध संस्कृति और विकास का प्रतीक है.
आज यूपी दिवस है, माने उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस. आज ही के दिन यानी 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक तौर पर उत्तर प्रदेश अस्तित्व में आया था. इससे पहले उत्तर प्रदेश की पहचान संयुक्त प्रांत था. उससे भी पहले समय समय पर इस राज्य को अलग अलग नामों से जाना और पहचाना जाता रहा है. लेकिन यदि हम वैदिक और पौराणिक ग्रंथों की मानें तो इस उत्तर प्रदेश की माटी का इतिहास लाखों साल पुराना है.
पौराणिक ग्रंथों में उत्तर प्रदेश के अलग अलग नामों से संबोधित किया गया है. इनमें कहीं इसे मध्य देश तो कहीं ब्रहर्षि देश कहा गया है. इनके लिए जिस भूभाग और भौगोलिक विवरणों का जिक्र किया गया है, इससे जाहिर होता है कि ये संबंधन उत्तर प्रदेश के लिए ही किए गए हैं. रामायण व महाभारत के दौर में इस पूरे भूभाग को किसी नाम विशेष से संबोधित तो नहीं किया गया है, लेकिन इसकी पहचान अयोध्या, काशी, मथुरा आदि के नाम से होती रही है. उस समय प्रयागराज की पहचान महर्षि भारद्वाज की प्रयोगशाला के रूप में थी. वहां वह वायु यान का परीक्षण करते थे.
अलग अलग नामों से रही पहचान
इसी प्रकार बलिया की पहचान ज्योतिष विज्ञान के रिसर्च की वजह से थी. यहां महर्षि भृगु ज्योतिष विज्ञान पर काम कर रहे थे. बाद में बौद्ध और जैन धर्म के उदय के बाद इस भूभाग की पहचान में सारनाथ का नाम भी जुड़ गया. यहीं पर बुद्ध का पहला उपदेश और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ था. फिर आया मध्यकाल. इस दौर में आगरा और दिल्ली पॉवर सेंटर रहे. यह दोनों शहर मुगलों की राजधानी थे. इसी प्रकार लखनऊ में अवध के नवाबों की राजधानी थी.
अंग्रेजों ने कई बार बदला नाम
18वीं-19वीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने जब इस पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर तो साल 1833 में इसका नाम नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंस दिया गया. फिर 1856 में इसमें अवध को मिलाने के बाद नया नाम नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंस एंड अवध दिया गया. फिर 1902 में इस प्रदेश को नया नाम ‘यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध’दिया गया. चूंकि ये नाम काफी बड़ा और थोड़ा अटपटा था. इसलिए अंग्रेजों ने साल 1935 में इसे छोटा कर ‘यूनाइटेड प्रोविंस’ (यूपी) कर दिया गया.
फिर बना उत्तर प्रदेश
1947 में देश को आजादी मिली तो एक बार फिर भारत सरकार ने प्रदेश का नाम बदला और 24 जनवरी 1950 को ‘उत्तर प्रदेश’ के नाम से नामकरण किया गया. फिर साल 2000 में उत्तर प्रदेश में से ही काटकर अलग राज्य उत्तराखंड का गठन किया गया. हालांकि दशकों तो प्रदेश में स्थापना दिवस मनाने की परंपरा नहीं थी. दस्तावेजों में इसे महज एक ऐतिहासिक तारीख माना गया. फिर साल 2017 में राज्यपाल राम नाईक ने सीएम योगी को स्थापना दिवस मनाने का सुझाव दिया. उसके बाद से यह तिथि पर जश्न मनाया जाने लगा.
ऐसे आया स्थापना दिवस का विचार
कहा जाता है कि एक मई 2017 को महाराष्ट्र का स्थापना दिवस मनाया जा रहा था. उस समय महाराष्ट्र के रहने वाले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के दिमाग में विचार आया कि महाराष्ट्र की तर्ज पर ही यूपी का स्थापना दिवस मनाया जाना चाहिए. उन्होंने सीएम योगी के सामने प्रस्ताव रखा. उस समय सीएम योगी ने इस प्रस्ताव को प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और विकास से जोड़ दिया. फिर कैबिनेट की बैठक में इसकी रूप रेखा तय की गई. तब से उत्तर प्रदेश में स्थापना दिवस मनाने का चलन शुरू हो गया.