पहले समय पर पंचायती चुनाव का दावा, अब क्यों प्रशासक की बात करने लगे ओमप्रकाश?

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की टाइमलाइन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, जो पहले समय पर चुनाव का दावा कर रहे थे, अब प्रशासकों की तैनाती की बात कर रहे हैं. उधर, हाईकोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी पर सरकार को तलब किया है, जिससे ओबीसी आरक्षण और चुनाव में और देरी की आशंका बढ़ गई है.

मंत्री ओमप्रकाश राजभर

उत्तर प्रदेश में समय पर पंचायत चुनाव का दावा करने वाले पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के सुर अब बदल गए हैं. अब वह चुनाव में हो रही देरी का हवाला देते हुए प्रशासकों की तैनाती की बात करने लगे हैं. उधर, हाईकोर्ट ने चुनाव में देरी और अब तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं होने पर प्रमुख सचिव पंचायती राज को तलब किया है. हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को 19 मई तक जबवा देने का अल्टीमेटम दिया है.

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सीधा जवाब तलब किया. पूछा कि विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अब तक क्यों नहीं किया गया? इस संबंध में खुद प्रमुख सचिव को हाजिर होकर जवाब दाखिल करने को कहा गया है. जबकि पूर्व में सरकार ने अदालत को भरोसा दिया था कि चुनाव से पहले आयोग का गठन कर लिया जाएगा और उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा. चूंकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. इसलिए अदालत ने नाराजगी जताई है.

प्रधान बन सकते हैं प्रशासक

इसी बीच पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा संकेत दिया. उन्होंने साफ किया कि पंचायत चुनाव तो टलेंगे. साथ ही गांवों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं. ऐसे में मौजूदा पदेन पदाधिकारियों, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है. इस संबंध में जल्द ही प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा.

मंत्री ने इसलिए लिया यूटर्न

मंत्री राजभर के मुताबिक चुनाव में देरी होने पर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव को लागू कराने की दिशा में प्रयास करेगी, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों. एक तरफ कोर्ट की सख्ती और दूसरी तरफ सरकार की तैयारी. इन दोनों के बीच पंचायत चुनाव की टाइमलाइन पर सवाल खड़े हो गए हैं. यदि पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जल्द नहीं होता, तो ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी अड़चनें बढ़ सकती हैं, जिससे चुनाव टलने की स्थिति भी बन सकती है.

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