इसी साल कराने होंगे पंचायत चुनाव! HC की सख्ती से बैकफुट पर सरकार, क्या असेंबली इलेक्शन में फंसेगा पेंच?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पंचायत चुनाव पर सरकार को सख्त आदेश दिया है. अब 10 जुलाई तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और चुनाव की तारीखें बतानी होंगी. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अक्टूबर-नवंबर में पंचायत चुनाव होने की संभावना है. इससे विधानसभा चुनाव की समय-सीमा भी प्रभावित हो सकती है. फरवरी से अप्रैल तक जनगणना कार्यक्रम होना है. इससे पहले कड़ाके की सर्दी में चुनाव कराने में अड़चन आ सकती है. ऐसे में माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव पंचायत चुनावों के ठीक बाद कराए जा सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने और पंचायत चुनाव टालने से खफा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को खरी-खरी सुनाई है. बुधवार को लखनऊ बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग की सभी दलीलों को खारिज कर दिया. साथ ही हर हाल में अगली तारीख यानी 10 जुलाई तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने इसी तारीख पर पंचायत चुनाव की तारीख भी बताने को कहा है.
इस सुनवाई में प्रदेश सरकार और प्रदेश चुनाव आयोग ने ओबीसी आयोग गठित होने और छह महीने में रिपोर्ट आने की बात कहते हुए हाईकोर्ट से समय लेने की कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट ने सख्त तेवर दिखाते हुए इस दलील को खारिज कर दिया. कहा कि 10 जुलाई को ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पेश करनी होगी. साथ ही उसी दिन यह बताना भी होगा कि किस महीने की किस तारीख को चुनाव कराए जाएंगे. हाईकोर्ट की इस सख्ती से प्रदेश सरकार में हड़कंप मच गया है.
अक्टूबर-नवंबर तक हो सकते हैं चुनाव
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ओबीसी आयोग ने अपना काम तेज कर दिया है. आयोग के पास एक महीने सात दिन का समय है. इसी में सर्वे करना है और इसकी रिपोर्ट तैयार कर 10 जुलाई को अपना रिपोर्ट पेश करना है. रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को हर हाल में तीन महीने के अंदर चुनाव कराना होगा. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार हाईकोर्ट में अक्टूबर-नवंबर की कोई तिथि पंचायत चुनाव के लिए बता सकती है.
फिर विधानसभा चुनाव का क्या होगा?
उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक है. इसलिए हर हाल में मई से पहले विधानसभा चुनाव कराने होंगे. नहीं कराने पर राष्ट्रपति शासन लागू करना होगा. चूंकि वही समय जनगणना के विशेष अभियान का भी है, जनगणना विभाग ने इसकी सूचना पहले ही चुनाव आयोग को दे दी है. कहा है कि फरवरी से अप्रैल तक सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल जनगणना में होगा. ऐसी स्थिति में विधानसभा चुनाव किसी भी हाल में फरवरी से पहले कराना होगा.
क्या ताबड़तोड़ होंगे चुनाव?
जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के दबाव में उत्तर प्रदेश सरकार यदि अक्टूबर नवंबर में पंचायत चुनाव कराती है तो लगे हाथ विधानसभा का चुनाव भी कराना होगा. कारण कि दिसंबर से फरवरी तक कड़ाके की सर्दी और कोहरे की स्थिति बन सकती है. ऐसे में हेलीकॉप्टर उतरने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारक चुनाव प्रचार में मुश्किल से पहुंच पाएंगे. इसके अलावा सर्दी की वजह से जनसभाओं भी भीड़ भी नहीं जुटेगी. ऐसी स्थिति में विधानसभा चुनाव दिसंबर से पहले ही कराना होगा.
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