जरीब और फीते से नहीं, अब इस तकनीक से होगी खेतों की पैमाइश; कुछ मिनट में पूरा होगा काम
उत्तर प्रदेश में अब जरीब-फीते की जगह अत्याधुनिक रोवर तकनीक से खेतों की पैमाइश का काम होने जा रहा है. यह नई प्रणाली पारंपरिक तरीकों से कहीं ज़्यादा तेज़ और सटीक है, जिससे घंटों का काम अब मिनटों में पूरा हो रहा है. रोवर तकनीक जमीनी विवादों को कम करेगी, पारदर्शिता लाएगी और डिजिटल रिकॉर्ड बनाने में सहायक होगी. यह भूमि मापन में क्रांति लाएगी, जिससे किसानों और राजस्व विभाग दोनों को फायदा होगा.
उत्तर प्रदेश में जमीनी विवाद निपटाने के लिए होने वाली पैमाइश का काम अब घंटों का नहीं, महज कुछ मिनटों का रह गया है. दरअसल, अब प्रदेश में पैमाइश पारंपरिक तरीका नहीं, बल्कि हाईटेक तरीके का इस्तेमाल होने जा रहा है. इसके लिए अत्याधुनिक रोवर तकनीक अपनाई जा रही है. इस तकनीक से काम में पारदर्शिता तो आएगी ही, समय की भी बचत होगी. यहां तक कि आबादी वाले क्षेत्र में भी पैमाइश का काम आसानी से संभव हो सकेगा.
उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड ने कानपुर जिले में ही चार रोवर भेजे हैं. इसमें सभी चारों तहसीलों में एक-एक रोवर भेजा गया है. राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक जमीनों की पैमाइश में परंपरागत तरीके से जरीब का इस्तेमाल होता था. यह काफी भारी होता था और एक नाप से दूसरे नाप तक खींचने के लिए काफी मशक्कत करनी होती थी. इसके चलते कई बार फीते का इस्तेमाल होने लगा था. इस पैमाइश के दौरान अक्सर जटिल नापजोख में सीमांकन का विवाद हो ही जाता था.
रोवर तकनीक से आएंगे सटीक रिपोर्ट
इन विवादों के चलते न्यायालयों में मुकदमे लगातार बढ़ते जा रहे थे. यही नहीं, परंपरागत तकनीक से दिन भर में मुश्किल से एक या दो पैमाइश ही हो पाती थी. राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नई रोवर तकनीक से सघन पैमाइश भी कुछ मिनट में पूरी हो जाएगी. इसमें आंकड़े भी सटीक आएंगे. इस प्रकार दिन भर में बड़े आराम से 10 से 12 खेतों की पैमाइश का काम संभव हो सकेगा.
ऐसे काम करेगी रोवर तकनीक
अधिकारियों के मुताबिक रोवर तकनीक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम आधारित सर्वे प्रणाली है. इसमें एक विशेष प्रकार का रोवर रिसीवर सैटेलाइट से लगातार सिग्नल प्राप्त करता है. फिर सीओआरएस नेटवर्क से जुड़कर जमीन का सटीक नाप स्थान निर्धारित करता है. इस तरह की पैमाइश में सीधे डिजिटल मैप और अभिलेखों से मिलान करते हुए प्रमाणिक सीमांकन हो सकेगा. इससे खेतों, प्लाटों आदि का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा. पैमाइश में त्रुटियों की संभावना ना के बराबर होगी.
