BLA बने 12122 और वोट जोड़े 0… अकेले लखनऊ में सियासी पार्टियों का रहा ये हाल

लखनऊ में चुनाव आयोग के SIR कार्यक्रम के तहत राजनीतिक दलों ने भले ही 12,122 बूथ लेवल एजेंट (BLA) बनाए, लेकिन इनमें से एक भी नया वोटर नहीं जोड़ पाए. डीएम के अनुसार, 33 दिन के अभियान के बावजूद किसी भी पार्टी, यहां तक कि बीजेपी के बीएलए ने भी फॉर्म-6 जमा नहीं किया. यह स्थिति उस समय है जब विपक्षी दल लगातार वोट काटने और जोड़ने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.

मतदाता सूची

उत्तर प्रदेश में SIR कार्यक्रम के दौरान लखनऊ में एक भी बीएलए नए वोट नहीं बनवा पाया है. यह खुलासा खुद लखनऊ के डीएम विशाख जी ने एसआईआर का बुलेटिन जारी करते हुए किया है. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत वैसे तो सभी राजनीतिक दलों ने कुल 12 हजार 122 बूथ लेवल एजेंट (BLA ) तैनात किए थे, लेकिन इनमें से एक भी बीएलए ऐसा नहीं है, जिसने किसी नए वोटर का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराया हो.

यह स्थिति उस समय है जब एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम कटवाने और जोड़ने को लेकर प्रदेश में बड़ा बवाल हुआ. लगभग सभी जिलों में विपक्षी दलों ने रैलियां निकालीं, ज्ञापन दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. लेकिन इनमें से किसी भी पार्टी के बीएलए ने वोटर लिस्ट में नए नाम जुड़वाने की पहल नहीं की. यहां तक कि सत्तारुढ़ बीजेपी के बीएलए भी नया नाम जुड़वाने नहीं आए.

33 दिन के सर्वे के बाद डीएम का दावा

एसआईआर कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में 6 जनवरी से घर-घर सर्वेक्षण का काम चल रहा है. 8 फरवरी तक कुल 33 दिन हो चुके हैं. लखनऊ के डीएम विशाख जी के मुताबिक इस कार्यक्रम में निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को भागीदार बनाया है. व्यवस्था दी है कि बीएलए घर-घर जाकर फॉर्म-6 (नाम जोड़ना) और फॉर्म-7 (नाम काटना) बांटेंगे, लोगों से भरवाएंगे और फिर इसे बीएलओ को सौंप देंगे. बावजूद इसके लखनऊ में तैनात किए गए 12122 एजेंटों में से किसी ने भी कोई फार्म नहीं दिया है.

बीजेपी ने बनाए थे सबसे ज्यादा बीएलओ

डीएम ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा 3542 बीएलए बीजेपी ने बनाए थे. इसी प्रकार सपा ने 3450 तो बसपा ने भी 2813 बीएलए की सूची दी थी. वहीं कांग्रेस के भी 2250 बीएलए बनाए गए थे. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के बीएलए द्वारा लाए गए फॉर्म को तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा, जबतक कि वह निर्धारित घोषणा पत्र संलग्न नहीं करेंगे. बिना घोषणा पत्र के आए फार्म को महज एक शिकायत माना जाएगा और इसी के आधार पर इस संबंध में कार्रवाई भी होगी.