भूपेंद्र चौधरी से लेकर हंसराज तक…सभी नए मंत्रियों को दफ्तर अलॉट, जानें कौन-कहां बैठेगा

योगी सरकार के सभी नए मंत्रियों के लिए दफ्तर तय कर दिया गया है. इसको लेकर आवास समिति के अध्यक्ष और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की भी मंजूरी आज मिल जाएगी. इसके बाद मंत्रियों के नाम पर दफ्तर आंवटन की अधिकारिक सूची जारी कर दी जाएगी.

योगी के नए मंत्रियों के दफ्तर हुए तय

यूपी में कैबिनेट विस्तार हो चुका है. सीएम योगी ने सभी नए मंत्रियों के लिए कार्यस्थल भी तय कर दिए हैं. सभी का कक्ष बापू भवन और विधान भवन में आवंटित किया गया है. हालांकि, इसको लेकर अब तक अधिकारिक सूचना नहीं जारी हुई है. आवास समिति के अध्यक्ष और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है, जो आज मिलने की संभावना है. इसके बाद मंत्रियों के लिए कार्यस्थल को लेकर अधिकारिक सूची जारी कर दी जाएगी.

किस मंत्री को कौन सा कक्ष आवंटित

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी को विधान भवन में कक्ष संख्या 82बी दिया गया है.वहीं, मनोज पांडेय को बापू भवन के 8वें टल पर कार्यालय आवंटित किया गया है. राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार सोमेंद्र तोमर को बापू भवन के चौथे तल पर दफ्तर मिला है. वहीं, अजीत सिंह पाल को इसी भवन तीसरे तल पर कमरा दिया गया है. इसके अलावा राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर बापू भवन के छठे तल पर बैठे हुए मिलेंगे. हंसराज विश्वकर्मा को भी इसी भवन के तीसरे टल पर कमरा दिया गया है. वहीं,कृष्णा पासवान को विज्ञान भवन में कक्ष संख्या एफ-34 आवंटित किया गया है.

जल्द होगा नए मंत्रियों के दिए जाने वाले विभागों का ऐलान

फिलहाल, मंत्रियों के कार्यस्थल तकरीबन तय कर दिए गए हैं. अब उन्हें मिलने वाले विभागों पर लोगों की नजरें हैं. दावा किया जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ से मंत्रियों को दिए जाने वाले विभागों की भी सूची भी तैयार कर ली गई है. बस इसका ऐलान किया जाना बाकी है. ऐसे में सबकी नजरें इसपर है कि किन मंत्रियों को शक्तिशाली या भारी भरकम विभाग मिलेगा. साथ ही पहले के मौजूद मंत्रियों में किनके विभागों कटौती होगी.

भारी-भरकम विभागों में कोई भी मंत्री नहीं चाहेगा कटौती

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम का वक्त शेष है. ऐसे में कोई भी मंत्री अपने भारी भरकम विभागों में कटौती नहीं चाहेंगे. दरअसल, इससे विपक्षी दल उनपर अपने विभागों में फेल होने का आरोप लगाते हुए चुनावी मैदान में उनके लिए भारी परेशानी खड़ा कर सकते हैं. उनके पक्ष में बना चुनावी नैरेटिव बदल सकता है.

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