500 मीटर में नशे की बिक्री नहीं… राज्यपाल की सख्ती के बाद योगी सरकार का बड़ा फैसला
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में नशीले पदार्थ और शराब मिलने के मामले के बाद योगी सरकार ने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की कार्ययोजना तैयार की है. अब यूनिवर्सिटी और कॉलेज के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ हॉस्टल, कैंटीन और परिसर में नियमित निरीक्षण होगा. ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर से आने वाली सामग्री की प्रवेश द्वार पर जांच की जाएगी.
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में नशीले पदार्थ और शराब मिलने के मामले पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की कड़ी नाराजगी के बाद योगी सरकार ने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है. इसके तहत अब प्रदेश के यूनिवर्सिटी और कॉलेज के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती की जाएगी. शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाया जाएगा.
इसके साथ ही यूनिवर्सिटी और कॉलेज के हॉस्टलों, कैंटीनों और पूरे परिसर में नियमित निरीक्षण किए जाएंगे. ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर के जरिए शिक्षण संस्थानों में पहुंचने वाली सामग्री की भी प्रवेश द्वार पर जांच की जाएगी. सरकार का उद्देश्य सिर्फ परिसर के भीतर नशे की उपलब्धता रोकना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों तक नशीले पदार्थों की पहुंच के संभावित रास्तों को भी बंद करना है.
राज्यपाल की नाराजगी के बाद सरकार ने बनाई कार्ययोजना
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के छात्रावासों में नशीले पदार्थ और शराब मिलने के मामले के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी. इसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ अभियान को व्यापक स्तर पर लागू करने का फैसला किया. इसी सिलसिले में विधानसभा परिसर में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी राजकीय यूनिवर्सिटी के कुलसचिवों और परीक्षा नियंत्रकों की बैठक हुई.
बैठक में उच्च शिक्षण संस्थानों में नशामुक्ति अभियान की विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया. सरकार ने साफ किया कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं हैं, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए शिक्षण संस्थानों को नशे से मुक्त और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है.
500 मीटर के दायरे में नशे की बिक्री पर रोक
नई कार्ययोजना का सबसे अहम हिस्सा शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक है. यूनिवर्सिटी और कॉलेज के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री नहीं होने दी जाएगी. इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में निगरानी और निरीक्षण बढ़ाया जाएगा. सरकार की कोशिश होगी कि छात्र-छात्राओं को शिक्षण संस्थान के आसपास ही नशे की सामग्री आसानी से उपलब्ध न हो सके. इसके साथ ही संस्थानों के अंदर भी नियमित जांच की जाएगी.
हॉस्टल और कैंटीन में भी होगी जांच
हॉस्टल, कैंटीन और परिसर के दूसरे हिस्सों को निगरानी के दायरे में रखा जाएगा. शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में हॉस्टल और कैंटीन होते हैं. इसलिए नई व्यवस्था में इन स्थानों पर विशेष निगरानी रखने का फैसला किया गया है. हॉस्टलों में नियमित निरीक्षण किया जाएगा. कैंटीन और परिसर में भी जांच की जाएगी, ताकि नशीले पदार्थों की उपलब्धता या इस्तेमाल की किसी भी संभावना को समय रहते रोका जा सके.
ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर पर भी नजर
आज के समय में सामान की ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर के जरिए किसी भी वस्तु को आसानी से मंगाया जा सकता है. ऐसे में सरकार ने शिक्षण संस्थानों में पहुंचने वाली ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर सामग्री को भी निगरानी के दायरे में रखा है. अब ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर से आने वाली सामग्री की प्रवेश द्वार पर जांच की जाएगी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षण संस्थानों के अंदर बाहरी माध्यम से कोई नशीला पदार्थ न पहुंच सके.
दो मिनट की नशामुक्ति शपथ से होगी दिन की शुरुआत
सरकार की नई कार्ययोजना केवल निगरानी और जांच तक सीमित नहीं रहेगी. विद्यार्थियों में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. नई व्यवस्था के तहत सभी राजकीय और निजी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में प्रत्येक कार्यदिवस की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को दो मिनट की नशामुक्ति शपथ दिलाई जाएगी. सरकार का मानना है कि लगातार जागरूकता के जरिए विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया जा सकता है.
रन फॉर नशामुक्ति से लेकर नुक्कड़ नाटक तक
नशामुक्ति अभियान को जनआंदोलन का रूप देने के लिए शिक्षण संस्थानों में अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इनमें रन फॉर नशामुक्ति, मैराथन, पथ संचलन, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और अन्य जनजागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे. इन कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को नशे से होने वाले सामाजिक, मानसिक और व्यक्तिगत नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा.
शिक्षक हर सप्ताह करेंगे विद्यार्थियों से संवाद
अभियान में शिक्षकों की भूमिका भी तय की गई है. प्रत्येक शिक्षक सप्ताह में एक बार अपनी कक्षा के अंतिम 10 मिनट नशामुक्ति विषय पर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे. इस दौरान विद्यार्थियों की समस्याओं, नशे की ओर बढ़ने के संभावित कारणों और इससे बचने के उपायों पर चर्चा की जाएगी. सरकार की कोशिश है कि नशामुक्ति को केवल एक अभियान के तौर पर नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों की नियमित गतिविधि का हिस्सा बनाया जाए.
