पहला मैटरनिटी लीव लेने के दो साल के भीतर दूसरे पर रोक नहीं लगाई जा सकती: HC
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच ने मैटरनिटी लीव पर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम सर्वोच्च कानून है, जो वित्तीय हैंडबुक के नियमों से ऊपर है. ऐसे में पहले मैटरनिटी लीव के दो साल के भीतर दूसरे अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच ने मैटरनिटी लीव को लेकर दायर एक याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि पहले मैटरनिटी लीव के दो साल के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है. साथ ही स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ अधिनियम सर्वोच्च कानून है, वित्तीय हैंडबुक के प्रावधान कानून से ऊपर नहीं हो सकते हैं.
जस्टिस करुणेश सिंह पवार की पीठ ने मनीषा यादव की याचिका पर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. मनीषा यादव ने याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग को 2 साल के अंतर के अभाव में अस्वीकार कर दिया गया था. इसके लिए राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियमों का हवाला दिया गया था.
याची को 6 अप्रैल से दो अक्तूबर तक मिला लीव
राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा गया था कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो साल का अंतराल जरूरी हैं. वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मनीषा यादव की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 लाभकारी कानून है. इसके प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
जस्टिस कुरुणेश सिंह ने इसपर कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया सर्वोच्च कानून है. यह किसी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों से ऊपर है. ऐसे में, दोनों में विरोधाभास हो, तो अधिनियम के प्रावधान ही प्रभावी होंगे. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पहले के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें याची की अवकाश की मांग को नकार दिया था.
कोर्ट ने पाया कि याची की पहली संतान होने के दो साल के भीतर ही उन्होंने 2026 में दूसरी प्रसूति अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधार पर खारिज कर दिया गया था. अदालत ने इस आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याची को छह अप्रैल 2026 से दो अक्तूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए.
मैटरनिटी लीव की अवधि अब 26 हफ्ते होगी
यह फैसला कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और उन्हें प्रसूति अवकाश का पूरा लाभ सुनिश्चित करेगा. मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत महिला कर्मचारी को उसकी गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और उसकी शुरुआती देखभाल के लिए अवकाश दिया जाता है. महिलाओं को इस अवकाश अवधि में उनकी पूरी सैलरी दी जाती है.
मैटरनिटी बेनिफिट अमेंडमेंट एक्ट 2017 के तहत, अब महिलाओं की इस लीव की अवधि 12 हफ़्ते से बढ़ाकर 26 हफ़्ते कर दिया गया है. हालांकि, जो महिलाएं अपने तीसरे बच्चे की उम्मीद कर रही हैं, उनके लिए यह समय 12 हफ़्ते ही रहेगा. महिलाएं यह छुट्टी डिलीवरी की अनुमानित तारीख से आठ हफ़्ते पहले और डिलीवरी के बाद ले सकती हैं.