गंगा एक्सप्रेस-वे पर सफर करने से पहले पढ़ लें यह खबर… अभी न पेट्रोल मिलेगा और न ही खाना

उत्तर प्रदेश का गंगा एक्सप्रेस-वे फर्राटे भरने के लिए लगभग तैयार है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है. दरअसल, इस एक्सप्रेसवे को भले ही ट्रॉयल के लिए इस महीने के आखिर में खोल दिया जाएगा और अगले महीने उद्घाटन भी हो जाएगा, लेकिन अगले एक साल तक इस 594 किमी लंबे मार्ग पर पेट्रोल पंप या खाने-पीने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी. दरअसल इस एक्सप्रेसवे पर जनसुविधा केंद्रों के निर्माण के लिए अभी जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है.

गंगा एक्सप्रेसवे Image Credit:

उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे फर्राटे भरने के तैयार है. 594 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे का काम पूरा हो चुका है. बीच-बीच में कहीं कहीं फीनिसिंग का काम बाकी है तो उसे भी उद्घाटन से पहले पूरा कर लिया जाएगा. लेकिन बड़ी बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे पर जगह जगह प्रस्तावित जन सुविधा केंद्र अभी तक नहीं बने हैं. इन जनसुविधा केंद्रों के लिए अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि काम पूरा होने में कम से कम एक साल का वक्त लग जाएगा. ऐसे में जाहिर है कि इस अवधि में एक्सप्रेसवे से यात्रा करने वालों को ना तो डीजल-पेट्रोल मिलेगा और ना ही कोई खाने पीने का आइटम.

यूपीडा अधिकारियों के मुताबिक इस एक्सप्रेसवे का काम चार खंडों में हुआ है. इसमें से 3 खंड में काम 100 प्रतिशत कंपलीट है, जबकि उन्नाव सेक्शन में थोड़ा सा काम बचा है. हालांकि इससे एक्सप्रेसवे के उद्घाटन या ट्रॉयल में कोई बाधा नहीं आने वाली. मेरठ से प्रयागराज तक कुल 1498 बड़े स्ट्रक्चर हैं. इन सभी स्ट्रक्चर के काम भी पूरे हो चुके हैं. यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार जनवरी के अंतिम सप्ताह में इस एक्सप्रेसवे को ट्रायल के लिए खोला जाएगा. इस दौरान अंतिम परीक्षण होगा और फिर 15 फरवरी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उदघाटन कर सकते है.

अभी कागजों में हैं जनसुविधा केंद्र

यूपीडा के अधिकारियों के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे पर हर 50 किमी की दूरी पर जनसुविधा केंद्र बनने हैं. इसमें पेट्रोल पंप और मॉटेल आदि शामिल हैं. इन्हीं केंद्रों पर शौचालय और रेस्टोरेंट आदि की भी सुविधाएं होंगी. इस एक्सप्रेसवे पर हापुड़ के पूठ में और हसनपुर में पेट्रोल-सीएनजी पंप बनाए जाने हैं. इसी प्रकार पेट्रोल पंप हरदोई, कानपुर व प्रयागराज सेक्टर में बनेंगे. इन सभी स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनने हैं. इनमें से हसनपुर के रुखालू में फूडकोर्ट का कार्य शुरू हो गया है. हालांकि बदायूं, सिंभावली और सदरपुर पर फूड-कोर्ट व वाहन पार्किंग के लिए अभी भूमि अधिग्रहण बाकी है. इन सुविधाओं के शुरू होने में कम से कम एक साल का वक्त लग सकता है.

फिर कैसे होगी इतनी लंबी यात्रा?

चूंकि मेरठ से प्रयागराज की दूरी 594 किमी है. चूंकि करीब एक साल तक इस एक्सप्रेसवे पर इंधन मिलने की संभावना ना के बराबर है, ऐसे में इस एक्सप्रेसवे से चलने वालों के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है. दरअसल शायद ही कोई गाड़ी हो, जिसमें एक बार इंधन भराने के बाद इतनी दूरी तय किया जा सके. ऐसे में सवाल है कि फिर इस एक्सप्रेसवे से यात्रा कैसे पूरी होगी. यूपीडा के अधिकारियों के मुताबिक ऐसी स्थिति में जगह जगह इंटरचेंज बने हैं. एक निर्धारित दूरी तक यात्रा के बाद लोगों को इंधन के लिए नीचे उतरना होगा और फिर इंधन लेकर दोबारा एक्सप्रेसवे पर चढ़ना होगा.

साथ लेकर चलना होगा खाना

मेरठ से प्रयागराज तक जाने में इस एक्सप्रेसवे से करीब 7 घंटे से अधिक समय लग सकता है. चूंकि अगले एक साल तक इस एक्सप्रेसवे पर मॉटेल या रेस्टोरेंट भी शुरू नहीं हो पाएंगे. ऐसे में इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ने से पहले ही लोगों को रास्ते में खाने-पीने का सामान गाड़ी में रखकर चलना होगा. अन्यथा बीच रास्ते में भूख प्यास लगने पर दूर-दूर तक कोई नजर भी नहीं आने वाला. ऐसी स्थिति में इंटरचेंज से एक्सप्रेसवे से बाहर निकल कर ही बाजार में कुछ खाने पीने को मिल सकता है.