23 से 25 साल की उम्र में लड़कियों की शादी, इंटरकास्ट मैरिज बैन; मेरठ जाट संसद में 11 प्रस्ताव पास

मेरठ में अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद ने 11 प्रस्ताव पारित किए. इसमें लड़कियों की शादी की उम्र 23 से 25 साल करना, बिरादरी से बाहर विवाह पर रोक का सुझाव भी शामिल है. साथ ही बैठक में 36 बिरादरियों के साथ सामाजिक भाईचारा बढ़ाने और सर छोटूराम को भारत रत्न की मांग की गई.

जाट संसद के दौरान पंजाब सीएम भगवंत मान

मेरठ के सकौती टांडा में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद का आयोजन किया गया. य़ह बैठक महाराजा सूरजमल की 20 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण के लिए था. इसमें में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मुख्य अतिथि थे. साथ ही राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान समेत कई बड़े जाट नेता मौजूद थे.

इस दौरान जाट सरदारी ने समाज के हित में 11 प्रमुख प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए. मुख्य निर्णयों में लड़कियों की शादी की उम्र 23 से 25 साल करना और अंतरजातीय विवाह पर रोक लगाना शामिल है. इसके साथ ही 36 बिरादरियों के साथ सामाजिक भाईचारा बढ़ाने और दीनबंधु, रहबरे आजम सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई गई.

उच्च पदों पर बैठे जाट नेताओं से मदद की अपील

अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद में पहला प्रस्ताव युवाओं को जाट इतिहास से जोड़ने पर केंद्रित रहा. समाज के युवाओं को जाट महापुरुषों का इतिहास पढ़ने और उनकी जयंती और पुण्यतिथि मनाने के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया गया. दूसरे प्रस्ताव में युवाओं को उच्च शिक्षा हासिल करने और स्वरोजगार तथा व्यापार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है.

तीसरे प्रस्ताव के तहत दीनबंधु, रहबरे आजम सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई गई. चौथे प्रस्ताव में जाट समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाकर युवाओं में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया. वहीं, पांचवें में अंतरजातीय विवाह पर रोक, जबकि छठे प्रस्ताव में उच्च पदों पर बैठे जाट नेताओं से समाज की मदद की अपील की.

क्षेत्रवाद-गोत्रवाद से उठकर जाट एकता को मजबूती

जाट संसद में द्वारा पास सातवें प्रस्ताव में क्षेत्रवाद और गोत्रवाद से ऊपर उठकर विश्व स्तर पर जाट एकता को मजबूत करने का आह्वान किया गया. आठवें में आरक्षण की बात हुई, फैसला हुआ कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उन राज्यों में जाटों को OBC आरक्षण दिलाने के लिए प्रयास तेज करने की बात कही गई, जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं है.

वही, नौवें प्रस्ताव में जाट महापुरुषों के इतिहास को सीबीएसई, एनसीईआरटी सहित राज्य और केंद्रीय पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग रखी गई. दसवें प्रस्ताव में बच्चों की शादियां 23 से 25 वर्ष की आयु के बीच करने की सलाह दी गई. वहीं, आखिरी और ग्यारहवें प्रस्ताव में 36 बिरादरियों के साथ सामाजिक भाईचारा बढ़ाने पर जोर दिया गया.

Follow Us