मखाने के लिए बिहार पर आश्रित नहीं रहेगा देश, अब UP में भी शुरू हुई खेती; मेरठ में बड़ा प्रयोग
उत्तर प्रदेश के मेरठ में अब मखाने की खेती शुरू हो गई है, जो अब तक बिहार की पहचान थी. कृषि विभाग की पहल पर किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिला, जिसमें उन्होंने बिहार के दरभंगा अनुसंधान केंद्र से तकनीक सीखी. यह गन्ने का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और जोखिम कम होने की उम्मीद है.
देख में मखाने की खेती के लिए अब तक बिहार का नाम लिया जाता था. लेकिन अब उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर कृषि विभाग ने मेरठ में बड़ा प्रयोग शुरू किया है. दशकों से गन्ने की फसल पर निर्भर रहने वाले मेरठ के किसानों का आकर्षण अब वैकल्पिक फसलों की ओर देखा जा रहा है. इसी क्रम में कृषि विभाग की निगरानी में यहां के किसानों ने मखाने की खेती की ओर कदम बढ़ा दिया है. यहां के किसानों ने उत्तर प्रदेश में मखाने की खेती की शुरुआत भी कर दी है.
जिले के कृषि विभाग ने इस दिशा में पहल करते हुए किसानों को मखाने की खेती से जोड़ने का निर्णय लिया. इसी क्रम में विभाग ने किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का प्रशिक्षण भी दिलाया. इसके लिए मेरठ के कुछ किसानों को बिहार के दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र भेजा गया, जहां उन्होंने मखाने की खेती और उसकी प्रोसेसिंग के बारे में विस्तार से सीखा.
गन्ने का विकल्प बनेगा मखाना
अधिकारियों के मुताबिक गन्ने की खेती में बढ़ती लागत, कीटों और रोगों के कारण किसानों की आय प्रभावित हो रही थी. ऐसे में यहां के किसान वैकल्पिक खेती का ख्वाब देखने लगे थे. इस तरह की सोच रखने वाले किसानों के लिए मखाना एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आया है, जो कम जोखिम और अच्छी आमदनी का अवसर देता है. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बताया गया कि मखाने की खेती के लिए खेत में गड्ढा बनाकर उसमें पानी भरना होता है और चिकनी मिट्टी का उपयोग करना चाहिए. आधुनिक तकनीक के तहत पॉलीथिन बिछाकर भी इसकी खेती की जा सकती है, जिससे उत्पादन बेहतर होता है.
11 किसान बने मास्टर ट्रेनर
बिहार के दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त 11 किसान “मास्टर ट्रेनर” बन गए हैं. ये किसान अब खुद तो मखाने की खेती करेंगे ही, अन्य किसानों को भी मार्गदर्शन देंगे. कृषि विभाग ने मखाने के बीज की व्यवस्था के लिए अनुसंधान केंद्र से संपर्क किया है, जो जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा. इस पहल से मेरठ के किसानों में नई उम्मीद जगी है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र मखाना उत्पादन का एक नया केंद्र बन सकता है, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी.