मुरादाबाद में देश का सबसे बड़ा ‘कच्चा माल बैंक! पीतल नगरी की ‘ग्लोबल’ हुंकार, चीन को मिलेगी टक्कर

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में देश का सबसे बड़ा कच्चा माल बैंक स्थापित हो रहा है. यह पहल पीतल व हस्तशिल्प निर्यातकों को कच्चे माल की अनिश्चितता से बचाएगी, जिससे वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. सरकार 70-90% तक वित्तीय सहायता देगी, जिससे छोटे व मध्यम निर्यातकों पर बोझ कम होगा. यह परियोजना चीन से प्रतिस्पर्धा में मुरादाबाद को नई पहचान देगी.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से विख्यात उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के नाम एक नया कीर्तिमान जुड़ने वाला है. इस शहर में देश का सबसे बड़ा कच्चा माल बैंक तैयार होने जा रहा है. पीतल और हस्तशिल्प निर्यात उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने और कच्चे माल की अनिश्चितता से सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत यहां एक विशाल रॉ-मटेरियल बैंक (कच्चा माल बैंक) स्थापित होगा.

इस दूरगामी प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है. इससे स्थानीय उद्यमियों और दस्तकारों को पीतल, तांबा, स्टील और एल्युमिनियम जैसे मूलभूत संसाधनों के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे यहां उत्पादन चक्र में निरंतरता बनी रहेगी. इस नवीन सरकारी पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका वित्तीय ढांचा है. इस परियोजना की लागत का लगभग सत्तर से 90% तक का भारी-भरकम हिस्सा सीधे सरकार वहन करेगी.

उद्यमियों को बड़ा फायदा

इस प्रोजेक्ट से छोटे और मध्यम वर्गीय निर्यातकों पर वित्तीय बोझ न के बराबर पड़ेगा. उन्हें अपनी जेब से मात्र दस से तीस प्रतिशत तक का ही आंशिक निवेश करना होगा. जिला उद्योग केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक कोई भी पंजीकृत निर्यातक संघ अथवा सहकारी समिति इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने के लिए एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) प्रभाग के अंतर्गत अपना विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती है.

चार करोड़ की शुरूआती लागत

नियमावली के मुताबिक यदि कोई निर्यातक समूह चार करोड़ रुपये तक की लागत से शुरुआती स्तर का रॉ-मटेरियल बैंक स्थापित करना चाहता है, तो सरकार उसे नब्बे प्रतिशत की भारी वित्तीय सब्सिडी प्रदान करेगी. संगठन को केवल दस प्रतिशत ही अंशदान देना होगा. इसके अतिरिक्त, मध्यम स्तर की योजनाओं के लिए, जिनकी लागत चार करोड़ से आठ करोड़ रुपये के बीच होगी, सरकारी सहायता अस्सी प्रतिशत निर्धारित की गई है. जिसमें निजी क्षेत्र का निवेश बीस प्रतिशत रहेगा. इसी प्रकार आठ से दस करोड़ रुपये तक के बड़े प्रोजेक्ट्स पर सरकार सत्तर प्रतिशत खर्च स्वयं उठाएगी.

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