दो साल पहले मर चुके शख्स को पुलिस ने बना दिया शांतिभंग का आरोपी, बयान दर्ज करने का भी दावा

मुरादाबाद में पुलिस की घोर लापरवाही का मामला सामने आया. यहां दो साल पहले मर चुके शख्स को शांतिभंग का आरोपी बना दिया गया है. अब इस मामले में कोर्ट ने पुलिस ने स्पष्टीकरण मांगा है. वहीं, पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सतपाल अंतिल केस पर काम कर रहे दरोगा को निलंबित कर दिया है.

मुरादाबाद में मृतक को बना दिया शांतिभंग का आरोपी Image Credit:

मुरादाबाद जनपद से खाकी की लापरवाही का एक ऐसा विचित्र मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की जमीनी जांच के दावों की कलई खोलकर रख दी है. पाकबड़ा थाना पुलिस ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के नाम पर केवल कागजों में खानापूर्ति करते हुए एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट भेज दी थी, जिसकी दो साल पहले मौत हो चुकी है.

मामले की जांच कर रहे दरोगा ने ना सिर्फ मृतक को इलाके की कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया था, बल्कि अपनी सरकारी रिपोर्ट में यह झूठा दावा भी कर दिया कि उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर आरोपी के बयान दर्ज किए हैं. इस त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट की थाना प्रभारी ने भी बिना पुष्टि किए संस्तुति कर दी थी, जिसके बाद मामला उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अदालत पहुंच गया था.

मृतक को बना दिया शांतिभंग का आरोपी

जब अदालत के भीतर उस मृत व्यक्ति की हाजिरी के लिए ‘नरेश हाजिर हों’ की आवाज गूंजी थी, तो वहां मौजूद उसकी पत्नी और भाई भावुक हो उठे. उन्होंने नम आंखों से कोर्ट को सूचित किया कि ‘हुजूर, वह तो दो साल पहले ही बीमारी के कारण इस दुनिया से विदा हो चुके हैं,’ मृत व्यक्ति को शांतिभंग में पाबंद करने की यह हास्यास्पद और गंभीर चूक सामने आते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सतपाल अंतिल कार्रवाई की है. उन्होंने एएसपी अभिनव द्विवेदी की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी दरोगा विनीत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं.

दरोगा की फर्जी तफ्तीश

पाकबड़ा थाना इलाके के अंतर्गत आने वाली नई बस्ती, कैलसा रोड के रहने वाले दिनेश और सदन नामक दो पड़ोसियों के परिवारों के बीच पुराना जमीनी या आपसी विवाद चल रहा है. इस आपसी टकराव को देखते हुए इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से थाने में तैनात दरोगा विनीत कुमार ने दोनों पक्षों की तरफ से चार-चार सदस्यों को चिह्नित करते हुए चालान की रिपोर्ट तैयार की थी. दरोगा ने अपनी रिपोर्ट में लिखित दावा किया था कि उन्होंने 28 मार्च 2026 को खुद घटनास्थल का दौरा किया है, स्थानीय स्तर पर बारीकी से तफ्तीश की और वहां मौजूद दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए, जिससे साबित होता है कि दोनों पक्षों से शांति व्यवस्था को खतरा है.

कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

दरोगा ने प्रथम पक्ष से दिनेश, उसकी पत्नी पूनम, भाई नरेश तथा नरेश की पत्नी रज्जो को नामजद किया था, जबकि दूसरे पक्ष से सदन, मंजू, जाह्नवी और साक्षी को आरोपी बनाया था. इस मामले की सुनवाई के लिए एसडीएम कोर्ट में तारीख तय थी, जहाँ दिनेश और उसका परिवार पेश हुआ था, जब अदालत के अर्दली ने ‘नरेश हाजिर हो’ की पुकार लगाई, तब जाकर पुलिस की इस कागजी बाजीगरी का भंडाफोड़ हुआ है. दिनेश और नरेश की पत्नी रज्जो ने मजिस्ट्रेट को बताया कि नरेश की दो साल पहले ही मृत्यु हो चुकी है, इस गंभीर लापरवाही पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस से स्पष्टीकरण की मांग की है.

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