नोएडा में जालसाजों की खैर नहीं! जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा साइबर थाना, खुलेगी फोरेंसिक लैब
नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए जेवर एयरपोर्ट के पास एक अत्याधुनिक साइबर थाना और फोरेंसिक लैब स्थापित किया जा रहा है. यमुना अथॉरिटी एक साल में इसका निर्माण पूरा कर पुलिस को सौंप देगी. यह सुविधा डिजिटल लेनदेन की बढ़ती संख्या के बीच अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण और तकनीकी जांच में तेजी लाएगी, जिससे क्षेत्र में साइबर सुरक्षा मजबूत होगी.
राष्ट्रीय राजधानी से सटे नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़े हैं. अब तक इन मामलों की जांच के लिए नोएडा पुलिस के पास पर्याप्त साजो सामान नहीं थे, लेकिन अब नोएडा पुलिस ने जिले में एक मजबूत साइबर नेटवर्क स्थापित करने का फैसला किया है. इसी क्रम में नोएडा पुलिस कमिश्नरेट ने जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस साइबर थाना शुरू करने जा रही है. इसके लिए यमुना अथॉरिटी ने जगह चिन्हित कर लिया है.
यमुना अथॉरिटी के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक साइबर थाना भवन का निर्माण खुद अथारिटी करेगी. यह काम एक साल के अंदर पूरा कर लिया जाएगा. इसके बाद भवन में अत्याधुनिक साजो सामान लगाकर नोएडा पुलिस को हैंडओवर कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया इस थाने के संचालन से नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एक्टिव साइबर अपराधियों पर प्रभावी नकेल कसी जा सकेगी. एसीईओ शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक इस समय जेवर एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक यूनिट, आईटी ओर रियल एस्टेट के क्षेत्र में तेजी से काम चल रहा है. इसकी वजह से डिजिटल लेनदेन भी खूब हो रहा है.
शासन से मिली मंजूरी
ऐसे में यहां साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं. इन अपराधियों को रोकने के लिए एक मजबूत नेटवर्क की जरूरत महसूस की जा रही थी. नोएडा पुलिस के प्रस्ताव पर यमुना अथॉरिटी ने अत्याधुनिक सुविधाओं और उपकरणों से लैस थाना भवन बनाकर पुलिस को सौंपने का फैसला किया है. इसके लिए शासन से मंजूरी मिल गई है. यह थाना भवन करीब 3500 वर्ग मीटर में बनेगा. इसमें करीब साढे तीन करोड़ की लागत आएगी. जल्द ही निर्माण काम शुरू होगा और एक साल के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा.
फोरेंसिक लैब भी बनेगा
नोएडा पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक इस साइबर थाना भवन में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस फॉरेंसिक लैब बनाने का भी प्रस्ताव है. इस लैब के बनने से विभिन्न मामलों की तकनीकी जांच के लिए दिल्ली या लखनऊ स्थित फोरेंसिक लैब पर निर्भर नहीं रहना होगा. बल्कि इस लैब की वजह से कम समय में बेहतर रिजल्ट मिल सकेगा. इसमें को मोबाइल, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, लैपटॉप, कंप्यूटर नेटवर्क आदि डिवाइस की जांच यहीं पर हो जाएगी. अभी तक जिले में एक साइबर थाना सेक्टर 36 से संचालित हो रहा है. इसमें डीसीपी, एडिशनल एडीसीपी और एसीपी साइबर क्राइम समेत करीब 50 पुलिसकर्मी तैनात हैं.