नोएडा से लखनऊ की दूरी होगी कम! 4000 करोड़ी गंगा लिंक एक्सप्रेसवे बनेगा गेमचेंजर
गंगा लिंक एक्सप्रेसवे कॉरिडोर दिल्ली-NCR से लखनऊ, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों तक सफर को तेज और सुगम बनाएगा. यमुना प्राधिकरण 78% भूमि अधिग्रहण पूरा कर चुका है, शेष जुलाई तक लक्ष्य है. यह कॉरिडोर गौतमबुद्ध नगर के 8 गांव और बुलंदशहर के 48 गांवों से होकर गुजरेगा.
दिल्ली-NCR, नोएडा एयरपोर्ट और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली गंगा लिंक एक्सप्रेसवे कॉरिडोर परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने परियोजना के लिए करीब 78% भूमि अधिग्रहण पूरा कर लिया है, शेष जुलाई तक लक्ष्य है. इसके बाद टेंडर और निर्माण कार्य शुरू होगा.
करीब 74.3 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का लगभग 20KM हिस्सा YEIDA क्षेत्र में बनेगा. सेक्टर-21 के पास इंटरचेंज बनाकर इसे यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा. इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, लखनऊ और बुंदेलखंड तक का सफर पहले से तेज और सुगम होगा.
कुल 56 गांवों से होकर गुजरेगा यह कॉरिडोर
गंगा लिंक एक्सप्रेसवे कॉरिडोर परियोजना करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जाएगी. इसके तहत 80 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और दोनों ओर सर्विस रोड बनाई जाएंगी. पूरे कॉरिडोर की चौड़ाई करीब 130 मीटर होगी. यमुना क्षेत्र में सड़क ग्राउंड लेवल पर बनेगी, जबकि जरूरत के अनुसार कुछ हिस्से एलिवेटेड भी होंगे.
यह कॉरिडोर गौतमबुद्ध नगर के 8 गांव और बुलंदशहर के 48 गांवों से होकर गुजरेगा. 14 गांव खुर्जा तहसील में हैं, जबकि बाकी बुलंदशहर और स्याना, शिकारपुर तहसील में हैं. मेहंदीपुर बांगर, भाईपुर ब्रह्मनान, रबूपुरा, भुन्नाटगा, म्याना, फाजिलपुर और कल्लूपुरा जेवर तहसील में हैं. जबकि मारहरा, मधुपुरा, कपाना, भगवानपुर जैसे गांव खुर्जा में हैं.
जेवर, यमुना और गंगा एक्सप्रेसवे साथ जुड़ेंगे
गंगा लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे उद्योग, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स, व्यापार और निवेश को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही किसानों को अपने उत्पाद कम समय और कम लागत में बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी.
यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह का कहना है कि इस कॉरिडोर से लाखों यात्रियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा. यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. परियोजना से प्रभावित किसानों को मुआवजा देकर तेजी से रजिस्ट्री कराई जा रही है
