फिर नोएडा सेक्टर 150 जैसा हादसा, खुले नाले में समाई कार, ऐसे बचाई गई ड्राइवर की जान
नोएडा में सेक्टर 150 कार हादसे जैसी एक और दुर्घटना सामने आई है. अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक स्विफ्ट कार खुले नाले में जा समाई है. हालांकि, पुलिस और फायर विभाग की टीम की मदद से समय रहते कार चालक को बचा लिया गया. साथ ही कार को भी बाहर निकाल लिया गया है.
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खुले नाले में गिर गई. सूचना मिलते ही आनन-फानन पर पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई. फिलहाल, गाड़ी में मौजूद चालक को सुरक्षित बचा लिया गया है. कार को भी क्रेन की मदद नाले से निकाल लिया गया है. यह हादसा गैलेक्सी गोल चक्कर से हनुमान मंदिर की ओर आने वाली सड़क पर हुआ.
सर्वोत्तम स्कूल के पास हुआ हादसा
स्विफ्ट कार चालक सुशील त्यागी रविवार देर रात कार से गैलेक्सी गोल चक्कर से हनुमान मंदिर की ओर जा रहे थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उनकी कार की रफ्तार तेज थी. इस दौरान सर्वोत्तम स्कूल के पास कार बेकाबू होकर नाले में जा गिरी. बताया जा रहा है कि हादसे वाली जगह बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं लगा था.
क्या नशे में था कार चालक?
घटना की सूचना पर पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची. सीढ़ी की मदद से कार चालक को बाहर निकाला गया. फिलहाल, उसे किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई है. पुलिस के मुताबिक कार चालक नशे में था. उसे यू टर्न लेना था, लेकिन नशे में होने के चलते उसे रास्ते का अंदेशा नहीं हुआ. ऐसे में वह अपनी कार लेकर सीधे रस्ते पर चला गया, जहां सड़क खत्म होने के बाद नाला था.
पुलिस ने क्या कहा?
प्रभारी निरीक्षक कृष्ण गोपाल शर्मा का कहना है कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है. समय रहते फायर सर्विस की मदद से वाहन को नाले से बाहर निकालने की कार्रवाई की गई. जबकि चालक पहले ही बाहर निकल आया था. शुरुआती जांच में मामला लापरवाही से वाहन चलाने का लग रहा है.
16 जनवरी को भी हुआ था ऐसा हादसा
16 जनवरी 2026 को भी ऐसा ही एक हादसा हुआ था. जब 27 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता, जो गुरुग्राम से घर लौट रहा था, घने कोहरे में एक निर्माणाधीन मॉल (रुके हुए प्रोजेक्ट) के खुले गड्ढे में गिर गया. 80-90 मिनट तक वो कार की छत पर चढ़कर वह बचाने की गुहार लगाता रहा था. लेकिन पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF के 80 से ज्यादा लोग तमाशा देखते रहे. एक बाप के सामने उसका बेटा जिंदगी की जंग हार गया और प्रशासन उसे बचा नहीं सका.