‘हिम्मत कैसे हुई’… नोएडा के स्टूडेंट को 5 लाख का नोटिस भेजने पर भड़का SC

ग्रेटर नोएडा में छात्र प्रदर्शन को लेकर यूपी पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. CJP के प्रस्तावित छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था. नोटिस में 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और 5 लाख रुपये के दो जमानती मुचलके मांगे गए थे. सुनवाई के दौरान CJI ने सवाल किया कि स्पष्ट आदेश के बावजूद मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?

अक्षत त्रिपाठी को भेजा गया था नोटिस

ग्रेटर नोएडा में छात्र प्रदर्शन को लेकर यूपी पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. मामला CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद एक छात्र को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से नोटिस जारी कर दिया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि नोटिस कैसे जारी कर दिया?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को जारी नोटिस का मामला पहुंचा. सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने CJI की अगुवाई वाली बेंच के सामने इस मामले को उठाया. उन्होंने बताया कि गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत त्रिपाठी को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से नोटिस दिया गया था. नोटिस में छात्र से 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और 5 लाख रुपये के दो जमानती मुचलके देने को कहा गया था.

4 सितंबर को कार्यवाही

पुलिस रिपोर्ट के आधार पर छात्र पर दूसरे छात्रों को CJP के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था. मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही CJP के छात्र प्रदर्शनों से जुड़े FIR को रद्द कर चुका है और छात्रों के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की दबाव डालने वाली कार्रवाई पर रोक लगा चुका है. इसके बावजूद 4 सितंबर को छात्र के खिलाफ BNSS की धाराओं के तहत कार्यवाही शुरू की गई.

‘हिम्मत कैसे की?’

पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि छात्र यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच कथित तौर पर सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैला रहा था और उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था. प्रशासन ने इसे शांति भंग होने की आशंका से जोड़ते हुए नोटिस जारी किया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो CJI ने बेहद कड़े शब्दों में सवाल उठाया. कोर्ट ने पूछा कि हमने स्पष्ट आदेश दिया था, तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?

‘नोटिस को रिकॉर्ड पर लाने को कहा’

सीजेआई ने साफ कहा कि कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता. सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि नोटिस बाद में वापस ले लिया गया है, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सिर्फ नोटिस वापस लेने से मामला खत्म नहीं हो जाता… अगर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस को रिकॉर्ड पर लाने को कहा.

क्या है मामला

पूरा विवाद CJP के प्रस्तावित छात्र प्रदर्शन को लेकर है. पुलिस का आरोप था कि छात्र अक्षत त्रिपाठी दूसरे छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे. पुलिस ने इससे इलाके में तनाव और शांति भंग होने की आशंका जताई. इसी आधार पर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 5 लाख रुपये के निजी मुचलके की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है और अब संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जा सकता है.

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