नोएडा में सॉल्वर गैंग का कंट्रोलरूम! UP-STF की छापेमारी में बड़ा खुलासा, बिहार-राजस्थान तक फैला था नेटवर्क
यूपी एसटीएफ ने नोएडा में सॉल्वर गैंग के हाई-टेक कंट्रोल रूम का भंडाफोड़ किया है. यह गैंग प्रॉक्सी सर्वर और स्क्रीन शेयरिंग के जरिए ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली करता था। एसटीएफ ने 7 बदमाशों को 50 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया है. इनका नेटवर्क बिहार-राजस्थान तक फैला था, जिसमें परीक्षार्थियों से 4 लाख रुपये वसूले जाते थे.
यूपी एसटीएफ ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सॉल्वर गैंग के कंट्रोल रूम का खुलासा किया है. गैंग के बदमाश इस कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे हाईटेक तरीके से पेपर आउट करते थे और इसी तरीके से ही सीधे सिस्टम में घुसकर पेपर भी हल कर देते थे. इसके एवज में बदमाश परीक्षार्थी से 4 लाख रुपये तक वसूल करते थे. इसमें 50 हजार रुपये तो इच्छुक परीक्षार्थियों को ढूंढ कर लाने वाले को देते थे. वहीं बाकी की साढ़े तीन लाख की रकम आपस में बांट लेते थे. एसटीएफ ने इस गैंग के 7 बदमाशों को अरेस्ट कर लिया है.
पुलिस ने इनके कब्जे से 50 लाख रुपए नगद, मोबाइल फोन लैपटॉप, राउटर और अभियर्थियो की सूची भी बरामद की है. पूछताछ में आरोपियों ने पेपर आउट कराने का जो तरीका बताया, वह सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई. आरोपियों ने बताया कि इस समय वह कर्मचारी चयन आयोग एसएससी द्वारा आयोजित सीपीएफ और एमएसएफ कांस्टेबल तथा असम राइफल्स भर्ती परीक्षा 2026 में धांधली कर रहे थे. एसटीएफ की नोएडा यूनिट के एडिशनल एसीपी राजकुमार मिश्रा के मुताबिक आरोपी परीक्षा केंद्र के सर्वर में प्रॉक्सी सर्वर लगाकर इस तरह की वारदात को अंजाम देते थे.
ऐसे आउट करते थे पेपर
एसटीएफ के मुताबिक ये सभी परीक्षाएं ऑनलाइन होती है. ऐसे में प्रॉक्सी सर्वर लगाने के बाद आरोपी स्क्रीनिंग शेयरिंग यूजर एप्लीकेशन के जरिए स्क्रीन कंट्रोल रूम में बैठे सॉल्वर को शेयर करते थे. फिर ये सॉल्वर सीधे सिस्टम में ही सही जवाब भर देते थे. इस प्रकार जितने उम्मीदवार मिलते थे, आरोपी कंट्रोलरूम में उतने ही सॉल्वर बैठाते थे. इसके लिए हरेक उम्मीदवार से आरोपी 4 लाख रुपये एडवांस में वसूल करते थे. इसमें से 50 हजार रुपये उम्मीदवार लाने वाले को मिलते थे. बाकी रकम आरोपी खुद बांट लेते थे.
मुजफ्फरनगर का है सरगना
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक इस गिरोह का सरगना प्रदीप चौहान निवासी खतौली मुजफ्फरनगर है. गिरोह में इसके अलावा अरुण कुमार, संदीप भाटी, निशांत राघव, अमित राणा, शकीरा मलिक, विवेक कुमार आदि भी मुख्य भूमिका में शामिल है. इन्हें भी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है. एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्र के मुताबिक आरोपी अरुण पहले परीक्षा केंद्र पर इनविजीलेटर के रूप में काम कर चुका है. बाद में वह यहां आईटी हेड बन गया इसी दौरान उसकी मुलाकात मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान से हुई. फिर दोनों ने मिलकर पूरा नेटवर्क तैयार किया. गिरोह में शामिल संदीप भाटी विभिन्न कंपनियों में लैब सुपरवाइजर के तौर पर काम कर चुका है. वही ऐसे अभ्यर्थियों को गैंग से जोड़ता था जो पैसे देकर परीक्षा पास करना चाहते थे.
