2-3 हजार में कैसे चले घर? नोएडा में मजदूरों के बाद अब सड़क पर उतरीं मेड, जोरदार प्रदर्शन
मजदूरों के आंदोलन के बीच नोएडा में घरेलू सहायिकाओं ने कम वेतन (2500-3000 रुपये), महंगाई और खराब कामकाजी परिस्थितियों के खिलाफ मंगलवार को प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि इतने कम पैसों में घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई और राशन-गैस का इंतजाम करना मुश्किल है. महिलाओं ने वेतन वृद्धि और महीने में चार छुट्टियों की मांग की है, चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर काम पर नहीं लौटेंगी.
उत्तर प्रदेश के नोएडा में चल रहा मजदूरों का आंदोलन अभी खत्म भी नहीं हुआ कि मंगलवार को यहां घरों में काम करने वाली मेड यानी घरेलू सहायिकाएं सड़क पर उतर गईं. नोएडा के सेक्टर 121 स्थित किलयो काउंटी सोसायटी में बड़ी संख्या में इकट्ठा हुई मेड ने शांति पूर्वक प्रदर्शन किया और अपने हक की आवाज बुलंद की. घरेलू सहायिकाओं का यह प्रदर्शन केवल मजदूर आंदोलन को समर्थन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं ने अपनी भी अलग-अलग मांगों को खुलकर समाज और सरकार के सामने रखा.
इन महिलाओं ने बताया कि इस महंगाई में मौजूदा वेतन और काम की स्थिति में उन्हें अपना घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. कहा कि उन्हें महीने में महज 2500 से 3000 रुपये तक का वेतन मिलता है. इतने पैसे में घर में दो रोटी की भी व्यवस्था नहीं हो पाती. ऐसे में वह कैसे रसाई में गैस सिलेंडर और राशन का जुगाड़ करें और कैसे बच्चों की पढ़ाई के लिए फीस एवं अन्य जरूरी खर्च का इंतजाम करें. इन महिलाओं ने बताया कि उनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है. ऐसे में सवाल है कि वह अपने परिवार का गुजारा कैसे करें.
जताई बेवशी
प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरी इन महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि ढाई-तीन हजार रुपए की कमाई से उन्हें घर चलाना मुश्किल हो गया है. महंगाई आसमान छू रही है, गैस, राशन, स्कूल की फीस सब कुछ महंगा हो चुका है. ऐसे में बच्चों की परवरिश करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. इन महिलाओं के मुताबिक जिन घरों में वो काम करती हैं, वहां के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है. वहीं उनके अपने बच्चों को मामूली शिक्षा भी वह नहीं दे पातीं. कहा कि उन्हें पूरे महीने में सिर्फ दो छुट्टियां मिलती हैं, इससे ज्यादा छुट्टी लेने पर वेतन से पैसे काट लिए जाते हैं.
महीने में चार छुट्टियों की मांग
महिलाओं ने कहा कि उन्हें भी हफ्ते में कम से कम एक दिन यानी महीने में कम से कम चार दिन की छुट्टी मिलनी चाहिए. कहा कि उन्हें भी अपने परिवार और बच्चों के लिए समय चाहिए. कई बार बच्चों के बीमार होने पर भी वह काम छोड़कर नहीं जा पाती. क्योंकि काम छोड़कर जाने से उनका वेतन से पैसे कट जाते हैं. इसलिए वह बेहतर कामकाजी परिस्थितियों पर काम करने की मांग कर रही है. महिलाओं ने साफ शब्दों कहा कि वेतन नहीं बढ़ा तो वह अब काम पर नहीं लौटेंगी.
शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन
सेंट्रल नोएडा की डीसीपी शैव्या गोयल के मुताबिक इन महिलाओं के प्रदर्शन से कहीं कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई. पूरे समय तक पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. वहीं नोएडा के सेक्टर 121 में कुछ महिलाएं सोसायटी के बाहर इकट्ठा हुई थी, उन्हें पुलिस ने शांति से समझा कर वापस घर भेज दिया था. अब इन सब के बीच घरेलू सहायिकाओं का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि असंतोष केवल फैक्ट्री तक सीमित नहीं बल्कि समाज के अन्य वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं.
