13 मुकदमे, 62 गिरफ्तारी… तीन दिन बाद पटरी पर लौटा नोएडा, भारी पुलिस बल अभी भी तैनात
नोएडा में हिंसक प्रदर्शन के बाद अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती नजर आ रही है. कई औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियां फिर से खुल गई है. श्रमिक अपने-अपने काम पर लौटने लगे हैं. इस बीच हिंसा में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है. जिसने सोशल मीडिया पर 80 से अधिक ग्रुप बनाकर मजदूरों को उकसाया.
नोएडा में तीन दिनों तक जारी हिंसक प्रदर्शन के बाद अब स्थिति सामान्य हैं. नोएडा फेस 2 सेक्टर 63 और 57 समेत कई औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियां फिर से खुल गई है और श्रमिक अपने-अपने काम पर लौटने लगे हैं. हालांकि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल अभी भी तैनात है, और पूरे इलाके में सख्त निगरानी की जा रही है.
इस पूरी हिंसा के पीछे पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा सोशल मीडिया को लेकर हुआ है. जानकारी के मुताबिक केवल तीन दिनों के भीतर करीब 80 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, जिसका काम केवल मजदूरों को उकसाने का था. नोएडा CP लक्ष्मी सिंह ने साफ कहा कि हिंसा में पाकिस्तान का हाथ था, दो ट्विटर हैंडल पाकिस्तान से चलाये जा रहे थे.
हिंसा में श्रमिको को गिरफ्तार नहीं किया गया- नोएडा CP
नोएडा CP लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हिंसा के साजिशकर्ता और आगजनी करने वालों पर 13 मुकदमे लिखे गए, जबकि अब तक 62 गिरफ्तार हुए हैं. हिंसा करने वाले भी गिरफ्तार हुए हैं, ज़्यादातर गिरफ्तार नॉन लेबर हैं, हिंसा करने वाले श्रमिको को गिरफ्तार नहीं किया गया. वहीं, उन्होंने बताया कि हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद अभी भी फरार है.
उन्होंने बताया कि दो दिन से नोएडा में शांति है, फ्लैगमार्च जारी है. श्रमिको ने अलग-अलग शिफ्ट में काम शुरू कर दिया है. नोएडा CP ने हिंसा में पाकिस्तान का हाथ बताते हुए कहा कि 13 तारीख को दो सोशल मीडिया द्वारा गलत तथ्य वायरल कराया गया था, दोनों ट्विटर हैंडल पाकिस्तान से चलाये जा रहे थे, जिसमें क्यूआर कोड से लोगों को जोड़ा गया था.
तीन संगठनों के नाम, मानेसर हिंसा से जुड़े मिले तार
जानकारी के मुताबिक केवल तीन दिनों के भीतर करीब 80 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे. इनमें से लगभग 50 ग्रुप की जानकारी पुलिस के पास पहुंच चुकी है जबकि 17 ग्रुप का सत्यापन भी किया जा चुका है. इन ग्रुप से मजदूरों की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा कम और भीड़ जुटाने और हिंसा फैलाने जैसे संदेश ज्यादा शेयर किया जा रहे हैं.
जांच में तीन संगठनों का नाम सामने आए हैं जिनमें मजदूर बिल्कुल दस्त प्रमुख बताया जा रहा है. इस संगठन से जुड़े लोगों पर आरोप है कि वह औद्योगिक क्षेत्र में घूम-घूम कर मजदूरों को भड़का रहे थे. पुलिस ने संगठन के प्रमुख नेता रूपेश राय को गिरफ्तार कर लिया है इसके अलावा 18 अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है जो मजदूरों को उकसाने में सक्रिय थे.
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन संगठनों और लोगों की भूमिका इस हिंसा में सामने आई है उनका संबंध हरियाणा के मानेसर से हुई औद्योगिक हिंसा से भी जुड़ा हुआ है. इससे पता चलता है कि यह नेटवर्क केवल नोएडा तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य राज्यों में भी सक्रिय है और समय-समय पर इस तरह के आंदोलन को बनाने में भूमिका निभाता रहा है.
यह मजदूरों का स्वाभाविक आंदोलन था? उठे सवाल
हिंसा के बाद पुलिस ने फेस टू, सेक्टर 63, सेक्टर 57 और ईकोटेक थर्ड इन सभी औद्योगिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है. हर संवेदनशील इलाकों में जवान तैनात हैं और ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जारी है. पुलिस का कहना है कि अगर कोई दोबारा माहौल बिगड़ने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं पूरे घटनाक्रम को देखते हुए अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ मजदूरों का स्वाभाविक आंदोलन था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी. जिस तरह से अचानक इतनी व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए भड़काऊ मैसेज फैलाई गई और अलग-अलग जगह पर एक साथ हिंसा हुई उससे यह मामला केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है.