शाहजहांपुर के फैज खान बने सोनू चौहान, अपनाया सनातन धर्म; कहा- मैं पहले से शिव भक्त हूं
शाहजहांपुर में एक मुस्लिम युवक ने सनातन धर्म स्वीकार किया है. उसने मां काली मंदिर में विधिविधान से पूजा कर खुद का नया नामकरण किया. फैज ने खुद को सोनू चौहान घोषित किया और सनातन धर्म अपनाया. फैज का कहना था कि वह सालों से शिवभक्त रहे हैं. उन्होंने इसे इसे आस्था का फैसला बताया.
यूपी के शाहजहांपुर में खिरनीबाग स्थित मां काली मंदिर में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे जिले में चर्चाओं का तूफान खड़ा कर दिया. यहां फैज खान नाम के युवक ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर, माता के चरणों में शीश झुकाकर खुद को ‘सोनू चौहान’ घोषित किया और सनातन धर्म को अपनाने का संकल्प लिया. फैज ने इसे आस्था का फैसला बताया.
शाहजहांपुर में पेशे से शिक्षक फैज खान ने अपनी शिवभक्ति के कारण सनातन धर्म अपनाया. घर वापसी के इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन हिंदू युवा नेता राजेश अवस्थी के नेतृत्व में संपन्न हुआ. जहां मंदिर परिसर में आस्था, गंभीरता और संकल्प का माहौल देखने को मिला. फैज से बने सोनू चौहान का साफ कहना है कि वो सालों से शिव की पूजा करते आ रहे हैं.
किसी दबाव में नहीं, स्वेच्छा से लिया निर्णय- फैज
यह ‘घर वापसी’ अब जिले में चर्चा का विषय बन गई है, जो व्यक्तिगत आस्था और स्वतंत्रता का संदेश दे रही है. फैज से सोनू चौहान बने शिक्षक का कहना है कि, ‘मैं पहले से ही शिव भक्त हूं, वर्षों से पूजा करता आ रहा हूं… यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि मेरी आस्था की यह सच्चाई है.’ उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से यह निर्णय लिया.
सोनू चौहान का कहना है कि वह काफी समय से भगवान शिव की भक्ति से प्रभावित थे. जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से हिंदू बनने का निर्णय लिया. उन्हें हिंदू धर्म की रीति-रिवाजों और संस्कृति में गहरी शांति महसूस होती थी. मंदिर में मौजूद लोगों के अनुसार, उन्होंने पूरे विधि-विधान से मां काली की पूजा की, संकल्प लिया और अपने नए जीवन की शुरुआत की.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विश्वास का मजबूत संदेश
दरअसल, थाना तिलहर क्षेत्र के हिंदू पट्टी निवासी फैज खान की गई घर वापसी के इस फैसले के बाद इलाके में चर्चाएं तेज हो गई हैं. कोई इसे व्यक्तिगत आस्था और स्वतंत्रता का निर्णय बता रहा है, तो कोई इसे एक बड़ा सामाजिक संदेश मान रहा है. यह घटना अब सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, यह अपने विश्वास के लिए खड़े होने की एक मजबूत गूंज बन चुकी है.
