गजब हाल है! 110 दिन की SIT जांच में युवराज की मौत के लिए दोषी मिले 3 पुलिसकर्मी, कैसे बेदाग हुई अथॉरिटी?
युवराज मेहता की नोएडा के बेसमेंट में मौत के मामले की SIT जांच रिपोर्ट आ गई है. इसमें पुलिस कंट्रोल रूम के 3 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं, जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि, नोएडा अथॉरिटी, फायर ब्रिगेड और NDRF को क्लीन चिट मिलने पर सवाल उठ रहे हैं. परिजनों और विशेषज्ञों का मानना है कि असली जिम्मेदार अथॉरिटी को बचा लिया गया, जिससे न्याय की उम्मीदें धूमिल हुई हैं. यह लीपापोती व्यवस्था पर फिर सवाल खड़ा करती है.
राष्ट्रीय राजधानी से सटे नोएडा सेक्टर 150 में पानी से लबालब खुले बेसमेंट में गिरकर इंजीनियर युवराज मेहता केस में एक बार फिर लीपापोती हो गई है. मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने 100 दिन की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है. इस रिपोर्ट में एसआईटी ने माना है कि पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एआरओ और आरआई समेत 3 पुलिसकर्मी दोषी हैं. वहीं एसआईटी ने इस घटना के लिए असली जिम्मेदार बताए जा रहे नोएडा प्राधिकरण, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ को एक तरह से क्लीनचिट दे दी है.
अब तक माना जा रहा है कि एसआईटी अपनी जांच में इन संस्थानों की भूमिका के साथ जवाबदेही तय करेगी. जिम्मेदार अधिकारियों पर एक्शन होगा, लेकिन एक बार फिर जांच के नाम पर खानापूर्ति हो गई है. बता दें कि 16 जनवरी 2026 की रात सेक्टर 150 स्थित जलभराव वाले खुले गड्ढे में युवराज मेहता की कार गिर गई थी. इस हादसे के दौरान युवराज मदद के लिए आवाज लगता रहा, लेकिन समय पर राहत नहीं पहुंच सकी और आखिरकार कड़ाके की ठंड में युवराज ने दम तोड़ दिया था.
सिस्टम पर उठे सवाल
काफी देर बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ और काफी मसक्कत के बाद युवराज के शव को बाहर निकाला गया. इस घटना ने ना केवल नोएडा, बल्कि पूरे देश के सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया था. देश भर से घटना के विरोध में आवाजें उठने लगीं. पूछा जाने लगा कि इतने खतरनाक गड्ढे को बिना मार्किंग और चेतावनी बोर्ड के खुला क्यों छोड़ा गया? समय रहते युवराज को मदद क्यों नहीं पहुंचाई गई? बाद में सीएम योगी ने खुद संज्ञान लिया और एसआईटी जांच के आदेश दिए. इससे उम्मीद जगी कि शायद दोषियों के खिलाफ एक्शन हो, लेकिन एक बार फिर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति हो गई.
700 लोगों से पूछताछ कर बनी रिपोर्ट
5 सदस्य एसआईटी ने इस घटना के बाबत करीब 700 लोगों से पूछताछ की. इनमें नोएडा पुलिस, प्राधिकरण, एनडीआरफ और फायर ब्रिगेड के तमाम अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. 100 दिन चली जांच के बाद अब एसआईटी ने रिपोर्ट दी है. इसमें पुलिस कंट्रोल रूम की भूमिका संदिग्ध माना है. कहा है कि कंट्रोल रूम ने हादसे की सूचना को गंभीरता से नहीं लिया, इसकी वजह से रेस्क्यू दल समय रहते एक्टिव नहीं हो पाया. एसआईटी की रिपोर्ट पर पुलिस कमिश्नर ने तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है.
कैसे नहीं मिली अथॉरिटी की भूमिका?
जानकारों का कहना है कि कंट्रोल रूम ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. ऐसे में कार्रवाई होनी ही चाहिए, लेकिन एसआईटी ने कैसे नोएडा अथॉरिटी और एनडीआरएफ को क्लीनचिट दी, यह समझ के परे है. जिस खुले गड्ढे में युवराज की मौत हुई, वहां सड़क सुरक्षा और निर्माण एजेंसियों की लापरवाही जाहिर होती है, इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नोएडा अथॉरिटी है. जिस सोसायटी में युवराज मेहता रहते थे, वहां के लोगों का कहना है कि अगर समय पर बैरिगेडिंग, चेतावनी संकेत या उचित सुरक्षा के इंतजाम होते तो शायद यह हादसा टल सकता था. ऐसे में एक बार फिर इस हादसे में नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है.
फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ पर भी उठे सवाल
फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की रेस्क्यू प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. घटना के बाद काफी देरी से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो सका था. थोड़ी देर से एनडीआरएफ पहुंच तो गई, लेकिन उसके पास पर्याप्त उपकरण नहीं थे. इसकी वजह से पानी में उतरने में देरी हुई. फायर ब्रिगेड के पास भी कोई ठोस उपकरण नहीं थे. युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने भी एसआईटी के इस न्याय पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि 100 दिन बाद कार्रवाई तो हुई, लेकिन असली जिम्मेदारों को बचा लिया गया.