HC ने देवरिया पुलिस को कहा ‘बंच ऑफ लायर्स’, SP ने मांगी माफी, SHO पर जुर्माना

यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. देवरिया के गौरी बाजार थाने में कथित अवैध हिरासत के मामले में पुलिस स्टेशन का CCTV फुटेज गायब मिला. पुलिस ने सिस्टम खराब होने की दलील दी, लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ. सुनवाई के दौरान SHO और देवरिया SP से तीखे सवाल किए गए. अधिकारियों की सफाई पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी में उन्हें ‘बंच ऑफ लायर्स’ तक कह दिया.

हाई कोर्ट ( फाइल फोटो)

यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है. कथित अवैध हिरासत के मामले में पुलिस स्टेशन का CCTV फुटेज गायब मिला. पुलिस ने CCTV सिस्टम में खराबी की बात कही, लेकिन कोर्ट पुलिस की इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने SHO और देवरिया के SP से तीखे सवाल किए. यहां तक कि पुलिस अधिकारियों की सफाई पर कोर्ट ने मौखिक तौर पर उन्हें ‘बंच ऑफ लायर्स’ तक कह दिया.

मामला देवरिया के गौरी बाजार थाने का है. चार याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उन्हें पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा. आरोप है कि कुछ लोगों को करीब 10 दिन तक और बाकी को अलग-अलग अवधि के लिए 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच हिरासत में रखा गया.. मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए हाईकोर्ट ने थाने का CCTV फुटेज मांगा.

CCTV खराब होने की GD में एंट्री नहीं

देवरिया पुलिस के पास उस अवधि की रिकॉर्डिंग नहीं मिली. पुलिस की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि CCTV सिस्टम में खराबी आ गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सवाल किया कि अगर कैमरा 14 अप्रैल से काम कर रहा था तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है? कोर्ट ने SHO से ये भी पूछा कि CCTV खराब होने और उसके ठीक होने की कोई GD एंट्री की गई थी या नहीं. SHO ने बताया कि 12 अप्रैल को CCTV सिस्टम में खराबी आई थी… लेकिन मरम्मत को लेकर कोई GD एंट्री नहीं की गई थी.

SP ने कोर्ट से मांगी माफी

देवरिया के SP ने कोर्ट को बताया कि उन्हें CCTV खराब होने की जानकारी ही नहीं दी गई थी. पुलिस की सफाई से नाराज हाईकोर्ट ने अधिकारियों से जवाबदेही तय करने को लेकर भी सवाल किया. SP ने कोर्ट से माफी मांगी तो जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि कोर्ट से माफी मत मांगिए, जनता से माफी मांगिए. कोर्ट ने पूछा कि अगर SHO दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? SP ने बताया कि SHO को क्राइम ब्रांच भेज दिया गया है. लेकिन हाईकोर्ट इस कार्रवाई से भी संतुष्ट नहीं हुआ.

‘हाई कोर्ट ने कहा कि आपने SHO को सस्पेंड या बर्खास्त क्यों नहीं किया? जो SHO अपने थाने की GD इंक्वायरी नहीं कर सकता, उसे बर्खास्त कर देना चाहिए… यह कांस्टेबल बनने के लायक भी न है.’

65 हजार रुपये का जुर्माना

हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत के लिए चारों याचिकाकर्ताओं को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. याचिकाकर्ता नंबर 2, 3 और 4 को 20-20 हजार रुपये और याचिकाकर्ता नंबर 1 को 5 हजार रुपये दिए जाएंगे. सबसे अहम बात ये है कि कोर्ट ने इस 65 हजार रुपये की रकम को SHO की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया है. CCTV को लेकर हाईकोर्ट की नाराजगी यहीं खत्म नहीं हुई.

CCTV के भुगतान पर भी सवाल

कोर्ट ने देवरिया जिले के थानों में CCTV लगाने के लिए जारी किए गए 46 लाख 46 हजार रुपये का भी जिक्र किया. कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब CCTV का काम पूरा नहीं हुआ था तो संबंधित एजेंसी को पूरा भुगतान क्यों कर दिया गया?कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय पूरी रकम जारी कर दी गई. हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई तब शुरू की जब मामला कोर्ट पहुंच गया.

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