माफिया अतीक अहमद की 345 करोड़ की जब्त संपत्ति पर बनेगा अस्पताल-पार्क!

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद, अशरफ और शाइस्ता परवीन की गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त करीब 345 करोड़ रुपये की संपत्तियों का अब जनहित में उपयोग किया जाएगा. प्रशासन ने इन जमीनों पर अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई है. इसके लिए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की है.

माफिया अतीक अहमद Image Credit: फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उनकी जब्त संपत्तियों के जनहित में उपयोग की नीति अब और आगे बढ़ रही है. प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ और पत्नी शाइस्ता परवीन की गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की गई करीब 345 करोड़ रुपये की संपत्तियों का अब सार्वजनिक हित में इस्तेमाल किया जाएगा. प्रशासन ने इन जमीनों पर अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, पार्क और अन्य जनसुविधाओं के विकास की योजना तैयार की है.

इसके लिए जिलाधिकारी ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है. जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के अनुसार, गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की गई चल और अचल संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और जनोपयोगी इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है. यह समिति तय करेगी कि किस जमीन का उपयोग किस सार्वजनिक परियोजना के लिए किया जाएगा.

प्रयागराज, कौशांबी और लखनऊ में फैली हैं संपत्तियां

योजना के तहत अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, पार्क और अन्य सामुदायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. प्रशासन द्वारा जब्त की गई संपत्तियां केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं हैं. कार्रवाई के दायरे में प्रयागराज, कौशांबी और लखनऊ में स्थित मकान, व्यावसायिक और आवासीय भूखंड, कृषि भूमि, बैंक खातों में जमा धनराशि और वाहन शामिल हैं. प्रयागराज के चकिया, करेली, झूंसी, धूमनगंज, कसारी-मसारी, देवघाट, सरेयां, रहीमाबाद, अकबरपुर और होलागढ़ सहित कई क्षेत्रों की संपत्तियां जब्त की गई हैं.

सबसे महंगी निकली होलागढ़ की कृषि भूमि

वहीं लखनऊ के गोमतीनगर और शेखपुर क्षेत्र की संपत्तियां भी कार्रवाई के दायरे में हैं. इसके अलावा विभिन्न बैंकों में मौजूद 13 खातों को भी सीज किया गया है. जांच में सामने आया है कि होलागढ़ स्थित अतीक अहमद की कृषि भूमि सबसे मूल्यवान संपत्ति है. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसकी अनुमानित बाजार कीमत 123.28 करोड़ रुपये आंकी गई है.

इसके अलावा रहीमाबाद-अकबरपुर क्षेत्र की संपत्तियों का मूल्य करीब 76 करोड़ रुपये, कौशांबी की कृषि भूमि का मूल्य लगभग 24 करोड़ रुपये और लखनऊ के शेखपुर क्षेत्र की जमीन का मूल्य करीब 30.60 करोड़ रुपये बताया गया है. कई अन्य मकानों और भूखंडों की कीमत भी 4 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है.

संपत्तियों की सुरक्षा और निगरानी भी करेगी समिति

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गठित समिति केवल जनहित में उपयोग की योजना ही नहीं बनाएगी, बल्कि जब्त संपत्तियों की सुरक्षा, नियमित निरीक्षण और अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी भी निभाएगी. समिति में प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए), एडीएम (वित्त एवं राजस्व), एडीएम (नजूल) समेत कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है.

पहले भी माफिया की जमीन पर बने हैं गरीबों के मकान

उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी माफियाओं से मुक्त कराई गई जमीन का जनहित में उपयोग कर चुकी है. प्रयागराज में अतीक अहमद के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के लिए आवास बनाए गए थे. अब 345 करोड़ रुपये की जब्त संपत्तियों को भी जनकल्याणकारी परियोजनाओं में बदलने की तैयारी की जा रही है.

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