अयोध्या में खड़े, प्रयागराज में पड़े और बागेश्वर धाम में अड़े… हनुमान जी के लिए धीरेंद्र शास्त्री ने ये क्या कह दिया?

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने प्रयागराज में हनुमंत कथा के दौरान हनुमान जी की महिमा बताई. उन्होंने कहा कि हनुमान जी अयोध्या में खड़े, प्रयागराज में पड़े और बागेश्वर धाम में सनातन विरोधियों के सामने अड़े हैं. शास्त्री ने 'व्यर्थ' शब्द की व्याख्या की, चुगलखोरों से बचने और नींद, पराई नारी, निंदा से दूर रहने की सीख दी. उन्होंने प्रयागराज के धार्मिक महत्व का भी बखान किया.

प्रयागराज में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों में प्रयागराज में हैं. यहां अरैल घाट पर आयोजित उनकी तीन दिवसीय हनुमंत कथा की आज पूर्णाहुति है. बुधवार को अपनी कथा में ‘सुंदरकांड’ के प्रसंगों का वर्णन किया. इसी दौरान उन्होंने प्रयागराज के लेटे हनुमान जी की महिमा बताई. कहा कि अयोध्या में हनुमान जी खड़े हैं. प्रयागराज में पड़े हैं और बागेश्वर धाम में सनातन विरोधियों के सामने अड़े हैं.

हनुमंत कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने एक शब्द ‘व्यर्थ’ को सामाजिक, राजनीतिक व आध्यात्मिक दृष्टिकोण से परिभाषित करने की कोशिश की. उन्होंने अपने अंदाज में श्रद्धालुओं को चुगलखोरों से 74 कदम दूर रहने की सीख दी. कहा कि इनके करीब जाने भर से ही तुम्हरा सब कुछ व्यर्थ हो जाएगा. उन्होंने तीन मंत्र दिए, कहा कि नींद, पराई नारी और निंदा से बचकर रहो तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं. उन्होंने श्रद्धालुओं से इन मंत्रों पर अमल के लिए हाथ उठाकर हामी भी भरवाई.

बहाई संगीतमयी भक्ति धारा

कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने विभिन्न प्रसंगों पर संगीतमयी प्रस्तुति दी. खासतौर पर उनके भजन ‘जीवन मौत का खेल है पगले क्या रोना क्या धोना…’ सुनाया तो श्रद्धालु गदगद हो गए. इस भजन में खूब तालियां बजीं. इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम, अक्षयवट और मनकामेश्वर के जयकारे लगाए. कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को समझाते हुए बताया है कि यहां तीन नदियों का संगम है. इनमें सरस्वती लुप्त नहीं हैं. बल्कि यहीं प्रयागराज में लिप्त हैं.

बताई प्रयागराज की महिमा

हनुमंत कथा शुरू करने से पहले बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने प्रयागराज का भ्रमण किया. खासतौर पर यहां मौजूद धार्मिक व पौराणिक महत्व के स्थानों पर जाकर दिव्य अनुभूति की. फिर उन्होंने त्रिवेणी संगम पहुंचकर पुण्य की डुबकी लगाई. उन्होंने अपनी कथा में भी प्रयागराज की महिमा का बखान किया. इस दौरान उन्होंने गंगा पूजन किया और लेटे हनुमान जी के दर्शन पूजन किए. इसमें उन्होंने देश और समाज के कल्याण की कामना की. उन्होंने बताया कि इसी क्रम में उन्होंने किले में मौजूद अक्षयवट व सरस्वती कूप के भी दर्शन पूजन किए हैं.

कथा में पहुंचे युधिष्ठिर और दुर्योधन

धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा में ‘महाभारत’ धारावाहिक में युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान और दुर्योधन की भूमिका निभाने वाले पुनीत इस्सर भी पहुंचे. इस मौके पर गजेंद्र चौहान ने श्रद्धालुओं से पूछा कि किस किसने महाभारत देखा? इसके जवाब में सभी लोगों ने हाथ उठाए. फिर उन्होंने पूछा कि किस किसके घर में महाभारत होता है? इसके जवाब में किसी ने हाथ नहीं उठाया. इस मौके पर गजेंद्र चौहान ने महाभारत के संवाद के जरिए श्रद्धालुओं को हिंदू राष्ट्र बनाने की शपथ दिलाई. कथा में पूर्व सांसद व भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी भी पहुंचे.

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