प्रयागराज में वकील जागृति शुक्ला की मौत पर आक्रोश, हाईवे जाम; बार ने पुलिस को दी 48 घंटे की मोहलत
अधिवक्ता जागृति शुक्ला की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. इसपर प्रयागराज में आक्रोशित वकीलों ने इलाहाबाद-कानपुर हाईवे जाम कर दिया है. वकीलों का आरोप है कि जागृति शुक्ला की मौत डॉक्टरी लापरवाही से हुई है, इसलिए यह हत्या है. वहीं, बार ने पुलिस को कार्रवाई के लिए 48 घंटे का समय दिया है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत का मामला तूल पकड़ते जा रहा है. प्रयागराज में सोमवार को आक्रोशित वकीलों ने इसको लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया. इस दौरान इलाहाबाद-कानपुर हाईवे जाम कर दिया गया. वकीलों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से जागृति शुक्ला की मौत हुई है, इसलिए यह मौत नहीं बल्कि हत्या है.
जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज में 20 मई को एक सड़क दुर्घटना में अधिवक्ता जागृति शुक्ला घायल हो गई थी. इसके बाद उनका इलाज लखनऊ के PGI अस्पताल में चल रहा था, जहां आज सुबह उनका दुखद निधन हो गया है. घायल होने के बाद जागृति को पहले एसआरएन अस्पताल ले जाया गया था, आरोप है कि वहां जूनियर डॉक्टरों ने लापरवाही की.
SRN के जूनियर डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग
एसआरएन अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों और वकीलों के बीच इलाज न करने को लेकर जमकर मारपीट भी हुई थी. उस समय भी तीन दिनों तक वकीलों ने जाम लगाकर हंगामा किया था. जिसके बाद 20 जूनियर डॉक्टरों को सस्पेंड करने के आश्वासन पर वकीलों ने आंदोलन खत्म कर दिया था. वहीं, आज सुबह जागृति की मौत की खबर से वकीलों का पारा और बढ़ गया.
आक्रोशित अधिवक्ता मारपीट के आरोपी एसआरएन के जूनियर डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. साथ ही जागृति शुक्ला को टक्कर मारने वाले वाहन के मालिक की गिरफ्तारी भी चाहते हैं. वकीलों का कहना है कि इसके साथ ही हत्या का मुकदमा भी दर्ज किया जाना चाहिए. उधर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है.
बार का चीफ जस्टिस को पत्र, पुलिस को अल्टीमेटम
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जागृति शुक्ला के निधन पर चीफ जस्टिस और अन्य न्यायमूर्तिगणों को पत्र लिखा है. पत्र में चिकित्सकीय लापरवाही से जागृति शुक्ला की मौत की बात कही गई है. हाईकोर्ट के अधिवक्ता आज लंच के बाद से न्याय कार्य से भी विरत रहे हैं. साथ ही बार एसोसिएशन ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए 48 घंटे की मोहलत दी है.
वहीं दूसरी ओर इस घटना को लेकर एस आर एन अस्पताल के जूनियर से लेकर सीनियर डॉक्टर भी अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं. डॉक्टर भी एसआरएन अस्पताल में बैठक कर लामबंद हो रहे हैं. डॉक्टर का कहना है कि किसी भी कीमत पर जूनियर डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे. फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं.
