महाकुंभ में मिला महामंडलेश्वर का ताज, अब क्यों बेआबरू होकर अखाड़े से निकलीं ममता कुलकर्णी? Inside Story

पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर का पद मिलने के एक साल बाद ही उन्हें किन्नर अखाड़े से बाहर कर दिया गया है. उनके विवादास्पद बयानों, खासकर शंकराचार्य और अंडरवर्ल्ड पर टिप्पणी को अखाड़े में कड़ी नाराजगी थी. उनके बयान को संत समाज के अपमान के रूप में देखा गया. उनके निष्काषन पर खुद आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्थिति स्पष्ट की है.

ममता कुलकर्णी के अखाड़े से बाहर होने की इनसाइड स्टोरी

अपने जमाने की मशहूर फिल्म एक्ट्रेस और ‘मुझको राना जी माफ करना…’ फेम ममता कुलकर्णी बड़े बेआबरू होकर किन्नर अखाड़े से निकलीं हैं. मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा कि खुद इस्तीफा दिया है, लेकिन किन्नर अखाड़े की अचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने साफ कहा कि संत समाज के खिलाफ बयान किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. चूंकि ममता बार बार समझाने के बाद भी नहीं मान रहीं थीं, इसलिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया है. दोनों के बयान विरोधाभाषी हैं.

आइए समझते हैं कि आखिर एक साल के अंदर ही क्यों ममता को ना केवल पद छोड़ना पड़ा, बल्कि उन्हें अखाड़े से भी बाहर जाना पड़ा. दरअसल, बॉलीवुड छोड़कर कुछ दिन गुमनाम रहीं ममता कुलकर्णी पिछले साल महाकुंभ के दौरान अचानक सुर्खियों में आ गईं थीं. उस समय किन्नर अखाड़े में उन्हें महामंडलेश्वर बनाया गया था. इसको लेकर तरह तरह के आरोप भी लगे थे. लेकिन एक साल के भीतर ही उनसे किन्नर अखाड़े ने यह पद छीन लिया है.

इसलिए ममता कुलकर्णी पर गिरी गाज

किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी के खिलाफ करीब छह महीने से ही खिंचड़ी पक रही थी. उन्हें संयम के साथ रहने और संयमित तरीके से बोलने के लिए कई बार अल्टीमेटम भी दिया गया. बावजूद इसके माघ मेले में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रकरण में ममता कुलकर्णी खुद को रोक नहीं पायी. उनका बयान सामने आते ही किन्नर अखाड़े ने उनके निष्काषन का फैसला सुना दिया. ऐसे हाल में ममता कुलकर्णी ने महज 1 साल 3 दिन बाद ही अपने पद और अखाड़े से त्याग पत्र दे दिया.

इन दो बयानों ने भी डाल आग में घी

शंकराचार्य के खिलाफ टिप्पणी से पहले ममता कुलकर्णी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था. इससे अखाड़े का माहौल गरम था. इतने में उन्होंने म्यूजिक डायरेक्टर एआर रहमान को लेकर बयान दिया. किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के मुताबिक शंकराचार्य पर बोलते हुए तो उन्होंने अति कर दी. बार-बार समझाने के बावजूद संयम नहीं रख पाने की स्थिति में उन्हें बाहर किया गया है. उन्होंने साफ कहा कि अब उनका किन्नर अखाड़े से कोई संबंध नहीं है.

ममता ने किया डैमेज कंट्रोल का प्रयास

आचार्य महामंडलेश्वर का बयान आने के बाद ममता कुलकर्णी ने भी डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें निकाला नहीं गया है, बल्कि उन्होंने खुद इस्तीफा दिया है. कहा कि सच्चा महंत या महामंडलेश्वर बनने के लिए वर्षों की साधना की जरूरत होती है. इसके लिए ध्यान, तपस्या और कठोर आध्यात्मिक अनुशासन जरूरी होता है. इस लिहाज से उन्हें अभी काफी मेहनत करने की जरूरत है.

क्या करना था और क्या किया?

महाकुंभ के दौरान ममता कुलकर्णी को सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए महामंडलेश्वर का पद दिया गया था. आचार्य महामंडलेश्वर के मुताबिक पद पाने के बाद वह अर्नगल बयान देने लगी थीं. उनके व्यवहार और बयान देखकर लग ही नहीं रहा था कि वह इस पद के योग्य हैं. आचार्य महांडलेश्वर डॉ. त्रिपाठी ने फिर दोहराया कि अखाड़ा तो सभी के लिए खुला है, लेकिन किसी को भी गलत या विवादित बयान देने की छूट नहीं है. ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बयान देकर संत समाज का अपमान किया है.