‘परेड कराया और सार्वजनिक उपहास उड़ाया’, दूसरे नोटिस पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब
प्रयागराज मेला प्राधिकरण की दूसरी नोटिस का भी जवाब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दे दिया है. उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि पुलिस ने पालकी घसीटने के साथ-साथ उनके और उनके शिष्यों से अपराधी जैसा व्यवहार किया. परेड कराया और सार्वजनिक उपहास उड़ाया. पालकी को जानबूझकर खतरनाक जगह ले जाया गया. नदी में गिराने की कोशिश की गई. उन्होंने इसे हत्या के प्रयास के बराबर बताया है.
प्रयागराज में प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजकर जवाब मांगा था कि क्यों ना आपकी एंट्री मेला क्षेत्र में हमेशा के लिए बैन कर दिया जाए. आपको मेला क्षेत्र में दी गई जमीन को निरस्त कर दिया जाए क्योंकि आपके मेले की व्यवस्था खराब हुई. लोगों की सुरक्षा पर खतरे में पड़ी. अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस नोटिस का जवाब मेला प्राधिकरण को भेज दिया है.
नोटिस का स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या दिया जवाब?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस के जवाब में कहा कि पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा 2500 साल पुरानी है और शंकराचार्य के काल से है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने, अनुयायियों के साथ मारपीट और अपमान करने का आरोप लगाया है.
‘पालकी को नदी में गिराने की कोशिश की गई’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने जवाब में कहा है कि पुलिस ने पालकी घसीटने के साथ-साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया. परेड कराया और सार्वजनिक उपहास उड़ाया. पालकी को जानबूझकर खतरनाक जगह ले जाया गया. नदी में गिराने की कोशिश की गई. उन्होंने इसे हत्या के प्रयास के बराबर बताया. यह धार्मिक भावना पर सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि पालकी पालकी कोई बग्घी नहीं है. उसमें पहिए ही नहीं है.
मौनी अमावस्या के दिन क्या हुआ था?
बता दें कि मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए जा रहे थे. इस दौरान पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी से जाने से मना करते हुए पैदल जाने को कहा. इसके लिए पुलिस ने भीड़ का हवाला दिया. इस दौरान पुलिस की अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हो गई. इस दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों को घसीटते और मारपीट करते हुए पुलिसवालों के वीडियो भी सामने आए थे. शिष्यों से मारपीट और पालकी रोके जाने से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद फिर धरने पर बैठ गए.
