शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद खत्म करेंगे अपना धरना, आज ही छोड़ देंगे मेला क्षेत्र

प्रयागराज प्रशासन से विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 11 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं. अब खबर सामने आ रही है कि आज 11 बजे वह अपना धरना खत्म कर देंगे. इसके बाद प्रयागराज मेला क्षेत्र छोड़कर अपने आश्रम चले जाएंगे.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (फाइल फोटो)

18 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन के बीच विवाद हो गया था. इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए थे. लगातार 11 दिन तक उनका धरना जारी था. अब खबर आ रही है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज अपना धरना खत्म करेंगे. 11 बजे के आसपास पत्रकारों से बात करेंगे. फिर इसके बाद मेला क्षेत्र से निकलकर प्रयागराज में ही अपने आश्रम चले जाएंगे.

मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जब स्नान करने के लिए जा रहे थे तो प्रशासन भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें पैदल जाने को कहा. इस बीच प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच झड़प हो गई. आरोप है कि पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की शिखाओं को पकड़कर घसीटा और उन्हें पीटा. तबसे ही अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे थे.

प्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे थे 2 नोटिस

प्रयागराज प्रशासन से विवाद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस भेजे गए थे. मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा था कि वह अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है. अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को 8 पेजों का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा है.

अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि जिससे अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका जाए. उन्होंने आगे कहा था शंकराचार्य पद का मामला कोर्ट में है. इसपर किसी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने और रोक लगाने का अधिकार नहीं है.

वहीं, दूसरे नोटिस में मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद से कहा था आपकी वजह से मेले की व्यवस्था खराब हुई. लोगों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हुआ. इसलिए स्पष्ट करें कि मेला क्षेत्र में आपको दी गई जमीन को निरस्त कर, आपको हमेशा के लिए मेले में घुसने पर प्रतिबंध क्यों न लगाया जाए. नोटिस में फिर से कहा गया है कि आप अपने शिविर के बाहर शंकराचार्य का बोर्ड लगा रहे हैं, जो कि कोर्ट की अवमानना है.

अविमुक्तेश्वनंद ने दूसरे नोटिस का दिया थे जवाब

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दूसरे नोटिस के जवाब में कहा कि पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा 2500 साल पुरानी है और शंकराचार्य के काल से है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने, अनुयायियों के साथ मारपीट और अपमान करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने पुलिस पर उनके शिष्यों का परेड कराने और सार्वजनिक उपहास उड़ाने का भी आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि पालकी को जानबूझकर खतरनाक जगह ले जाया गया. नदी में गिराने की कोशिश की गई. उन्होंने इसे हत्या के प्रयास के बराबर बताया. यह धार्मिक भावना पर सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि पालकी पालकी कोई बग्घी नहीं है. उसमें पहिए ही नहीं है.