संगम में स्नान करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद! प्रशासन मांगेगा माफी, लेकिन शंकराचार्य ने रखी ये शर्त
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के संगम स्नान को लेकर चला विवाद अब समाप्त हो गया है. प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार है और उनकी दो शर्तें भी मान ली गई हैं. इन शर्तों के मंजूर होने के बाद, शंकराचार्य माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान करेंगे.
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म होने वाला है. सरकार की नरमी के बाद अब प्रयागराज प्रशासन और मेला प्रशासन के भी तेवर नरम हो गए हैं. प्रशासन ने शंकराचार्य से माफी मांगने को भी तैयार है. हालांकि शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बात करने आए अधिकारियों के सामने दो शर्तें रख दी है. इसमें पहली शर्त माफी मांगने वाली है. वहीं दूसरी शर्त मेले में शंकराचार्यों के स्नान के लिए प्रोटोकॉल की है.
कहा जा रहा है कि शासन और प्रशासन ने शंकराचार्य की दोनों शर्तें मान ली है. इस संबंध में बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है. बस औपचारिक घोषणा बाकी है. यह जानकारी खुद शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने दी. ऐसे में माना जा रहा है कि शंकराचार्य माघी पूर्णिमा यानी एक फरवरी को अपने लाव लश्कर के साथ संगम स्नान करेंगे. मौनी अमावस्या को पालकी पर सवार होकर स्नान करने जा रहे शंकराचार्य को रोके जाने से वह नाराज हो गए थे. यही नहीं, वह अचानक संगम में अपना शिविर छोड़कर काशी आ गए थे.
लगातार हमलावर था विपक्ष
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष उत्तर प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन पर लगातार हमलावर था. हालांकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पहले ही नरमी के संकेत दे दिए थे. इस संबंध में लखनऊ से कुछ अधिकारियों को बातचीत के लिए शंकराचार्य के पास भेजा गया था. काफी मान मनौवल के बाद शंकराचार्य ने सरकार के सामने दो शर्तें रखीं थी. इसमें इसमें पहली शर्त माफी मांगने की थी और दूसरी शर्त प्रोटोकाल की. सरकार ने दोनों शर्तें मान ली है. अब माना जा रहा है कि जल्द ही अधिकारी उनसे माफी मांगने काशी जाएंगे और इसके बाद शंकराचार्य भी अपने शिविर में लौट आएंगे.
ऐसे सुलझा मामला
शंकराचार्य से विवाद लगातार गहराने से उत्तर प्रदेश सरकार काफी दबाव में आ गई थी. मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने की वजह से इसका असर आगामी पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनावों पर भी पड़ने का डर था. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक हुई. हालांकि इसमें प्रशासन माफी मांगने को तैयार नहीं था. बावजूद इसके शंकराचार्य को इस मीटिंग की सूचना दे दी गई. इसके बाद अचानक शंकराचार्य प्रयागराज छोड़कर काशी आ गए. ऐसे में अधिकारियों की दोबारा बैठक हुई और इसमें तय हुआ है कि मेला प्रशासन के अधिकारी खुद बनारस जाएंगे और शंकराचार्य से माफी मांगकर उन्हें स्नान के लिए प्रयागराज ले आएंगे.
