प्रयागराज: अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर हंगामा, लाठी-डंडे के साथ जबरन घुसने की कोशिश, थाने में शिकायत
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाद जमकर हंगामा किया गया. इस दौरान लाठी-डंडे लिए उपद्रवियों ने जबरन शिविर में घुसने की कोशिश की. हमले के बाद पुलिस में तहरीर दी गई और सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की है.
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार सात दिनों से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं. इस बीच शनिवार देर शाम उन्होंने अपने शिविर पर असामाजिक तत्वों द्वारा हमले को लेकर पुलिस में तहरीर दी है. उन्होंने अपनी, श्रद्धालुओं और संपत्ति की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बताया है. साथ ही सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से कल्पवासी थाना अध्यक्ष को तहरीर दी गई है. इसमें आरोप है कि शिविर के बाहर शाम 6:30 से 7:30 बजे के बीच कुछ असामाजिक तत्व पहुंच गए. वह हाथों में लाठी-डंडे और भगवा झंडा लिए हुए थे. इस दौरान कुछ युवक जबरन शिविर में प्रवेश करने लगे और उपद्रव मचाने की कोशिश की गई.
यह तहरीर शिविर व्यवस्थापक पंकज पांडेय की ओर से दी गई है. सेक्टर चार, त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शिविर स्थित है. शिकायत में कहा गया है कि असामाजिक तत्व शिविर के बाहर उपद्रव मचाने लगे और वे मारपीट करने पर आमादा थे. इस दौरान कुछ लोगों ने ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ के नारे बी लगाए.
इसमें कहा गया कि शिविर के बाहर उपस्थित सेवकों एवं कार्यकर्ताओं ने उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से शिविर से बाहर किया गया, लेकिन यह परिस्थिति अत्यंत गंभीर थी और किसी भी क्षण कोई बड़ी अप्रिय घटना घटित हो सकती थी. साथ ही उपद्रवियों पर कानूनी कार्रवाई और मेला प्रशासन से शिविर के बाहर सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की गई है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी चेतावनी है कि अगर शरारती तत्व शिविर में फिर से प्रवेश करते हैं, तो श्रद्धालुओं और शिविर की संपत्ति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है. इसलिए सुरक्षा बल की तैनाती कर अनहोनी से पूरी तरह से बचाव किया जाए. साथ ही कहा गया कि अगर भविष्य में कुछ भी होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर पहले से विवाद चल रहा है. मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर पालकी के साथ स्नान के लिए जाने से रोकने पर विवाद हुआ था. इसके बाद से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं. उनका कहना है कि जबतक प्रशासन अपने दुरव्यवहार के लिए मांफी नहीं मागता, वो स्नान नहीं करेंगे.