UP में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द, धांधली के खुलासे के बाद फैसला; फिर अब क्या होगा?

उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2025 की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक और धांधली के कारण रद्द कर दी गई है. यूपी एसटीएफ ने जांच के दौरान फर्जी प्रश्नपत्र गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने मॉडरेशन के दौरान प्रश्नपत्र लीक करने की बात स्वीकार की है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा रद्द कर निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से नई परीक्षा कराने का आदेश दिया है.

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग

उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2025 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में धांधली और अवैध वसूली का खुलासा होने के बाद सरकार ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया है. यूपी एसटीएफ ने मामले की जांच करते हुए फर्जी प्रश्नपत्र गिरोह के तीन सदस्यों को अरेस्ट किया है. इन जालसाजों की पहचान महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल के रूप में हुई है. इन्होंने एसटीएफ की पूछताछ में माना है कि मॉडरेशन के दौरान प्रश्नपत्र लीक किया गया. एसटीएफ ने जब डेटा एनालिसिस किया तो इससे भी कई संदिग्ध अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आई है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करने के साथ नए सिरे से परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं. सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण रखा जाए. इसमें किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दास्त नहीं की जाएगी. उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को जल्द से जल्द निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से परीक्षा कराने को कहा है.

अप्रैल 2025 में हुए थे एग्जाम

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या-51 के तहत सहायक आचार्य पद के लिए अप्रैल 2025 में परीक्षा आयोजित किया था. इस परीक्षा के बाद धांधली की गोपनीय शिकायतें आई थीं. इन शिकायतों की जांच करते हुए एसटीएफ ने एग्जाम में धांधली एवं अवैध धन वसूली का खुलासा किया है. एसटीएफ ने इस परीक्षा में पेपर लीक करने और फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग से जुड़े तीन लोगों को अरेस्ट किया है. इस संबंध में राजधानी लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है.

आयोग के अध्यक्ष से लिया गया था त्यागपत्र

जानकारी के मुताबिक यह मामला सामने आने के बाद ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष से त्यागपत्र ले लिया गया था. दरअसल गिरोह का सरगना महबूब अली आयोग अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था. पूछताछ के दौरान महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र लीक किए थे. इसके बदले उसने कई अभ्यथियों से मोटी रकम वसूल की थी.