राम मंदिर पर फहरा धर्म ध्वज, 70% यजमान-अतिथि दलित और पिछड़े, किन्नरों को भी था न्योता
राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम में 7 हजार अतिथियों में 70 प्रतिशत से ज्यादा दलित, अति पिछड़े और पिछड़ी जातियों के लोगों को न्योता दिया गया था. इसके अलावा किन्नरों को भी इस कार्यक्रम का इनिविटेशन दिया गया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराया. इस कार्यक्रम के सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित समुदायों के लोगों को भी विशेष तौर पर भी न्योता दिया गया था. इससे सरकार की तरफ से लोगों के बीच समाजिक समरसता का संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई.
बता दें कि जिस राम ने केवट को गले लगाया, शबरी के जूठे बेर खाए और निषादराज को मित्र बनाया, उसी राम का भव्य मंदिर अब समाज के हर उपेक्षित वर्ग को गले लगा रहा है. इस धर्म ध्वजारोहण कार्यक्रम ने साफ संदेश दिया है कि राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर का मंदिर नहीं, सामाजिक समरसता का भी जीता-जागता प्रतीक है.
7 हजार को ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए मिला था न्योता
पांच दिवसीय ध्वजारोहण अनुष्ठान और मुख्य समारोह में शामिल होने वाले 7 हजार अतिथियों में 70 प्रतिशत से ज्यादा दलित, अति पिछड़े और पिछड़ी जातियों के लोग थे. ये कोई साधारण मेहमान नहीं, अपने-अपने समाज के बड़े चेहरे हैं. कोई गांव का प्रधान है तो कोई जातीय संगठन का प्रदेश अध्यक्ष. इसके अलावा इन समुदाय के धार्मिक गुरूओं और समाजसेवियों को भी इस कार्यक्रम के लिए न्योता दिया गया था.
कौन-कौन से समाज के लोग शामिल?
राम मंदिर के ध्वजारोहण के कार्यक्रम में किन्नर समाज, कहार, बारी, बक्सरिया, नाई, कुम्हार, गडरिया, लोधी, यादव, माली, धोबी, लोहार, तमोली, पासी, वाल्मीकि, रविदासिया, बहेलिया, कसौधन, नट, कुर्मी समेत दर्जनों उपेक्षित एवं पिछड़े समुदायों के प्रतिनिधि रामलला शामिल थे.
यजमानों की सूची में कौन-कौन था शामिल
मुख्य यजमान में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र जरूर थे. लेकिन उनके साथ कोरी समाज के शैलेंद्र कोरी (भाजपा महानगर महामंत्री), पासवान समाज से विधायक चंद्रभानु पासवान के माता-पिता, मौर्य समाज से विहिप नेता निरंकार मौर्य और प्रियदर्शी परिवार से राशि प्रियदर्शी जैसे कई चेहरे शामिल थे. यानी आधे से ज्यादा यजमान भी उपेक्षित वर्गों से हैं.
राम मंदिर सिर्फ भव्य नहीं, समावेशी भी है
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने कहा कि राम मंदिर किसी जाति का मंदिर नहीं है. यह राष्ट्र मंदिर है. जिस राम ने कभी भेदभाव नहीं किया, उनके मंदिर में भी कोई भेदभाव नहीं होगा. ध्वजारोहण से यह संदेश पूरे देश में जा रहा है कि राम सबके हैं और सब राम के हैं. रामलला का नया मंदिर सिर्फ भव्य नहीं, समावेशी भी है. यह समावेश सिर्फ दिखावा नहीं, राम की मर्यादा है.
