5 करोड़ रुपये की रामचरितमानस कहां है? राम मंदिर ट्रस्ट ने बताई पूरी सच्चाई

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की 'स्वर्ण रामचरितमानस' की तस्वीरें जारी की हैं. ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दान की गई 147 किलोग्राम वजनी स्वर्ण रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और मंदिर परिसर में संरक्षित रखी गई है. यह विवाद तब शुरू हुआ था जब दानकर्ता ने इसकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे.

5 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण रामचरितमानस

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ‘सोने की रामचरितमानस’ की सच्चाई बता दी है. पूर्व केंद्रीय गृह सचिव द्वारा दान की गई करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण रामचरितमानस को लेकर उठे सवालों के बाद ट्रस्ट ने पहली बार उसकी तस्वीरें जारी करते हुए दावा किया है कि रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और मंदिर परिसर में संरक्षित रखी गई है. ट्रस्ट का कहना है कि इसे न तो हटाया गया है और न ही गायब किया गया है.

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार ने भगवान रामलला के लिए लगभग 147 किलोग्राम वजनी स्वर्णमंडित रामचरितमानस दान की थी, जिसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जाती है. उन्होंने कहा कि यह रामचरितमानस सोना, चांदी और तांबे से तैयार कराई गई थी और इसमें संपूर्ण रामचरितमानस की चौपाइयां अंकित हैं.

इसे राम मंदिर में स्थापित किए जाने के बाद शुरुआती कुछ महीनों तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था, लेकिन बाद में यह सार्वजनिक प्रदर्शन से हटा दी गई. इसके बाद जब उन्होंने कई बार ट्रस्ट से इसकी जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए कि आखिर इतनी मूल्यवान धार्मिक धरोहर कहां है.

चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ी चिंता

पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन ने यह भी कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ियों और चोरी के आरोप सामने आने के बाद लोगों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया कि उन्होंने जो स्वर्ण रामचरितमानस दान की थी, वह सुरक्षित है या नहीं. उनका कहना था कि यदि श्रद्धालु करोड़ों रुपये मूल्य की धार्मिक वस्तुएं मंदिर को दान करते हैं तो उनकी सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना ट्रस्ट की जिम्मेदारी है.

ट्रस्ट ने पहली बार जारी की तस्वीरें

उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भगवान को समर्पित बहुमूल्य धरोहर सुरक्षित रहे. विवाद बढ़ने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार स्वर्ण रामचरितमानस की तस्वीरें सार्वजनिक की हैं. ट्रस्ट ने कहा कि स्वर्ण रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और उसे मंदिर परिसर में संरक्षित रखा गया है. इसे चोरी, क्षति या अन्य खतरे से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखा गया है.

कैसी है यह स्वर्ण रामचरितमानस?

ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में आने वाली प्रत्येक बहुमूल्य वस्तु को हमेशा सार्वजनिक प्रदर्शन पर रखना संभव नहीं होता. सुरक्षा और संरक्षण को देखते हुए समय-समय पर बहुमूल्य वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है. तस्वीरें जारी कर ट्रस्ट ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि स्वर्ण रामचरितमानस को लेकर लगाए जा रहे आशंकाओं का कोई आधार नहीं है. जानकारी के अनुसार यह रामचरितमानस सामान्य धार्मिक ग्रंथ नहीं है.

यह रामचरितमानस लगभग 147 किलोग्राम वजन की है. इसमें सोना, चांदी और तांबे का उपयोग किया गया है. इसकी अनुमानित कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये है. संपूर्ण रामचरितमानस की चौपाइयों का अंकन है. इसे भगवान रामलला के लिए विशेष रूप से तैयार कराया गया था और प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर ट्रस्ट को समर्पित किया गया था. स्वर्ण रामचरितमानस का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की एसआईटी जांच कर रही है.

एसआईटी जांच के बीच नया मोड़

सूत्रों के अनुसार एसआईटी केवल नकदी और आभूषणों की कथित चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि दान प्रबंधन व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्तियां, वित्तीय प्रक्रियाएं, ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली, रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे कई पहलुओं की भी जांच कर रही है. इसी कारण मंदिर में मौजूद बहुमूल्य धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है. राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.

आगे क्या?

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की जांच अभी जारी है. एसआईटी कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट क्या सामने लाती है और क्या मंदिर में दान प्रबंधन तथा बहुमूल्य धार्मिक वस्तुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भविष्य में कोई नई प्रणाली लागू की जाती है. फिलहाल ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठे सवाल अभी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं.

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